हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दिलाने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। 18 अप्रैल से सुप्रीम कोर्ट हर दिन लाइव स्ट्रीमिंग हो रही है। मथुरा में विश्व हिंदू परिषद ने बैठक की। महामंडलेश्वर संत चित्रप्रकाशानंद महाराज ने कहा,” हिंदू धर्म में शादी केवल सुख भोगने का एक अवसर नहीं है। इसके साथ संबंधों को संयमित रखना, उनका उचित पोषण करना, वंश परंपरा को आगे बढ़ाना और अपनी संतति को समाज के लिए नागरिक बनाना भी है। समलैंगिक विवाहों में ये संभावनाएं समाप्त हो जाती है। इसको यदि अनुमति दी गई तो कई प्रकार के विवादों को जन्म दिया जाएगा। समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं की सुनवाई से उठे विवाद पर मथुरा- वृंदावन के संत समाज और धर्म प्रचारकों ने विरोध शुरू कर दिया है। विहिप के बैनर तले संतो ने इसे भारतीय संस्कृति पर कुठारा घात बताया है। विहिप के बैनर तले एक प्रमुख संतो और धर्म प्रचारकों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय इस महत्वपूर्ण विषय पर कोई भी निर्णय देने से पहले भारतीय संस्कृति की मूल भावना को समझे। क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय नए विवादों को जन्म देगा। साधु संत और धर्माचार्यों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर कोई भी निर्णय देने से पहले देश के धर्म गुरुओं,समाज, विज्ञानियों और शिक्षाविदों की समिति बनाकर वृहद स्तर पर अध्ययन करें। भागवत प्रवक्ता संजीव कृष्ण ठाकुर ने कहा कि एक तरफ तो समलैंगिक संबंधों को प्रकट करने के लिए मना किया गया। वहीं, दूसरी तरफ उनके विवाह की अनुमति पर विचार किया जा रहा है। क्या इससे निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं होगा। कथा वाचक रसिया बाबा ने एक प्रश्न के जवाब में कहा, “दत्तक देने के नियम, उत्तराधिकार के नियम, तलाक संबंधी नियम आदि को विवाद के अंतर्गत लाया जाए। समलैंगिक संबंध वाले अपने आप को लैंगिक अल्पसंख्यक घोषित करके अपने लिए विभिन्न प्रकार के आरक्षण की मांग भी कर सकते हैं। विहिप के महानगर अध्यक्ष अमित जैन ने सर्वोच्च न्यायालय से निवेदन किया है कि वे इस तरह की टिप्पणी को वापस लें। इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले इसके विभिन्न पक्षों तथा उनके परिणामों का गहन अध्ययन करवाएं अन्यथा इस प्रक्रिया का समाज के द्वारा विधि सम्मत ढंग से विरोध किया जाएगा।
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Author: Vijay Singhal
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