हिदुस्तान 24 टिव8 न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। रेलवे के मथुरा-वृंदावन ब्राॅडगेज प्रोजेक्ट में बाधा बन रही नई बस्ती के लोगों को हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी याचिका को प्रथम दृष्टया खारिज करते हुए रेलवे के संपत्ति अधिकारी की अदालत में अपनी बात रखने को कहा है।
श्री कृष्ण जन्मस्थान से पहले रेलवे लाइन के दोनों और बसी नई बस्ती मथुरा-वृंदावन ब्रॉडगेज कार्य में बाधा बन रही है। रेलवे ने अवैध तौर पर काबिज इस बस्ती के लोगों को अपने निर्माण स्वत: हटाने के नोटिस दिए थे, लेकिन इसी बीच बस्ती वासी हाईकोर्ट चले गए। इनकी पैरवी कर याकूब ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से राहत देने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को नियमानुसार रेलवे के संपत्ति अधिकारी की अदालत में अपनी बात रखने को कहा है। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद याचिकाकर्ता ने रेलवे के संपत्ति अधिकारी स्टेट ऑफिसर सीनियर डीईएन की अदालत में अपना पक्ष रखा। यहां पर दो सुनवाई हो भी चुकी हैं। आगरा मंडल की पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि रेलवे संबंधी मामलों को हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई के लिए तभी स्वीकार किया जाता है जब वह मामले रेलवे की अदालत द्वारा सुने जा चुके हों। इसीलिए हाईकोर्ट ने इस मामले में भी नई बस्ती की ओर से याचिका दायर करने वाले को यही निर्देश दिए हैं कि वह पहले रेलवे की कोर्ट में सुनवाई के लिए पेश हों। पहली तारीख पर नई बस्ती के लोग आ नहीं सके थे।
श्री कृष्ण जन्मस्थान से पहले रेलवे लाइन के दोनों और बसी नई बस्ती मथुरा-वृंदावन ब्रॉडगेज कार्य में बाधा बन रही है। रेलवे ने अवैध तौर पर काबिज इस बस्ती के लोगों को अपने निर्माण स्वत: हटाने के नोटिस दिए थे, लेकिन इसी बीच बस्ती वासी हाईकोर्ट चले गए। इनकी पैरवी कर याकूब ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से राहत देने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को नियमानुसार रेलवे के संपत्ति अधिकारी की अदालत में अपनी बात रखने को कहा है। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद याचिकाकर्ता ने रेलवे के संपत्ति अधिकारी स्टेट ऑफिसर सीनियर डीईएन की अदालत में अपना पक्ष रखा। यहां पर दो सुनवाई हो भी चुकी हैं। आगरा मंडल की पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि रेलवे संबंधी मामलों को हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई के लिए तभी स्वीकार किया जाता है जब वह मामले रेलवे की अदालत द्वारा सुने जा चुके हों। इसीलिए हाईकोर्ट ने इस मामले में भी नई बस्ती की ओर से याचिका दायर करने वाले को यही निर्देश दिए हैं कि वह पहले रेलवे की कोर्ट में सुनवाई के लिए पेश हों। पहली तारीख पर नई बस्ती के लोग आ नहीं सके थे।
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Author: Vijay Singhal
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