हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा ई-रिक्शा व्यापार एसोसिएशन की बैठक में बृहस्पतिवार को ई-वाहनों के पंजीकरण और प्रतिबंध से जुडे़ मुद्दों पर मंथन करने के साथ ही सरकार से इन वाहनों की बिक्री के संबंध में ठोस नीति बनाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि वृंदावन और गोवर्धन में लगने वाले जाम का कारण ई-रिक्शा को बताकर इनकी बिक्री पर रोक लगा दी है। परिवहन विभाग में इनका पंजीकरण नहीं होने से जिले में ई-रिक्शा नहीं बिक पा रहे हैं। प्रशासन की इस नीति से डीलर्स भी मुसीबत में आ गए। प्रशासन रोजगार नहीं दे पा रहा है तो डीलर्स को जहर ही दे दे। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष संजय यादव ने कहा कि यातायात पुलिस चालान की आड़ में ई-रिक्शा चालकों का शोषण कर रही है। वर्ष 2014 में ई-रिक्शा को बढ़ावा दिया गया था, तो लोगों ने रोजगार के रूप में अपनाते हुए बड़ी संख्या में खरीद की। शुरूआत में ई-रिक्शा के पंजीकरण की आवश्यकता जैसी शर्त नहीं थी, लेकिन अब ई-रिक्शा चालकों को रूट व पंजीकरण कराने जैसी सख्ती का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कई दिनों से जनपद में ई-रिक्शा वालों के लगातार चालान काटे जा रहे हैं। 1000 रुपये लेकर छोड़ा जाता है। जगराम भारतीय ने कहा कि दो महीने हो गए ई-रिक्शा का पंजीकरण न होने से इनकी बिक्री नहीं हो पा रही है। इसके कारण वह अपने कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रहे हैं। रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वृंदावन और गोवर्धन में ई-रिक्शा जाम का कारण बन रहे हैं तो वहां के लिए नए पंजीकरण न किए जाएं, अगर मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन करेंगे। प्रतिबंध लगाने से बेरोजगारी बढ़ेगी और रोजगार न होने की दशा में अपराध भी बढ़ते हैं। रूट निर्धारण के नाम पर भी ई-रिक्शा चालकों का शोषण किया जा रहा है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को ठोस नीति बननी चाहिए। जब देश भर में चार पहिया ई-वाहनों की बिक्री हो सकती है तो ई-रिक्शा वाहन की क्यों नहीं। बैठक में जिला महासचिव सलीम खान, पवन ठाकुर, सोनू अग्रवाल, फैजल खान, नरेंद्र, मोहित शर्मा, सुभाष सैनी, नौशाद अली, नदीम, आलिया, महेश चंद्र अग्रवाल, शिवकुमार, जगराम यादव व प्रहलाद यादव आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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