हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृन्दावन में अक्रूर घाट स्थित श्रीपंचमुखी हनुमान मंदिर में गौसेवा मिशन के द्वारा गौ-राष्ट्र रक्षा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि व काशी विश्वनाथ मुक्ति हेतु 40 दिवसीय श्रीहनुमंत जन्म महोत्सव गौसेवा मिशन के अध्यक्ष, प्रख्यात संत, गौ कृपा मूर्ति स्वामी कृष्णानन्द महाराज “भूरी वाले” के पावन सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा एवं धूमधाम के चल रहा है।जिसके अंतर्गत चल रही सप्त दिवसीय अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठ से विश्वविख्यात भागवत प्रवक्ता आचार्य मृदुलकांत शास्त्री अपनी सुमधुर वाणी में देश-विदेश से आए असंख्य भक्तों-श्रृद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण का रसास्वादन करा रहे हैं।इसके अलावा 108 ब्राह्मणों के द्वारा नित्य श्रीमद्भागवत मूल पारायण, 108 विप्र बटुकों के द्वारा श्रीहनुमान चालीसा पाठ एवं सुंदरकांड का सामूहिक पाठ किया जा रहा है।
व्यासपीठ से विश्वविख्यात भागवत प्रवक्ता आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने सभी भक्तों-श्रृद्धालुओं को गिरिराज गोवर्धन लीला की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि सप्त कोसीय गिरिराज गोवर्धन का प्रादुर्भाव श्रीराधा रानी की इच्छा से ही भगवान श्रीकृष्ण के वक्षस्थल से हुआ है।इसलिए वे उन्हीं के साक्षात स्वरूप माने जाते हैं।उनमें और भगवान श्रीकृष्ण में कोई भेद नहीं है।गिरिराज गोवर्धन की पूजा – आराधना व प्रदक्षिणा करने से भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी की सेवा करने का फल प्राप्त होता है।
आचार्य मृदुलकांत शास्त्री महाराज ने कहा कि द्वापर युग में जब देवराज इंद्र को अत्यंत अभिमान हो गया था, तब उनके अभिमान का नाश करने की लिए ही भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराज लीला की थी और सप्त कोसीय गिरिराज गोवर्धन को अपने नख पर धारण कर समूचे ब्रज मंडल की रक्षा की।इसीलिए गिरिराज गोवर्धन समस्त ब्रज वासियों के ईष्ट देव हैं।
कथा के अंतर्गत गिरिराज गोवर्धन की अत्यंत नयनाभिराम व चित्ताकर्षक झांकी सजाई गई।साथ ही 56 भोग भी लगाए गए।
महोत्सव में विशिष्ठ अतिथि के रूप में पधारे भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा, मथुरा-वृंदावन नगर निगम के मेयर विनोद अग्रवाल, डिप्टी मेयर मुकेश सारस्वत, धर्म रक्षा मंच के दिनेश लवानिया, भाजपा नेता विनीत शर्मा, पार्षद सुमित गौतम एवं सुधांशु खंडेलवाल आदि ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर चतु:संप्रदाय के श्रीमहंत फूलडोल बिहारीदास महाराज, प्रख्यात धर्माचार्य मनुश्री महाराज, याज्ञिक रत्न आचार्य विष्णुकांत शास्त्री, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ, स्वामी अवधेशानंद महाराज, विपिन बापू, अशोक व्यास, गौसेवी संत गोपेश बाबा, विपिन अग्रवाल, मुकुट वाले, भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी, कृष्ण कुमार शर्मा, लड्डू, जीवनदत्त शुक्ला, डॉ. राधाकांत शर्मा, भूपेश भारद्वाज, लोकेश गोस्वामी आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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Author: Vijay Singhal
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