हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में स्थित दक्षिण भारतीय शैली के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में गज ग्राह लीला का भव्य मंचन किया गया। गरुण पर विराजमान भगवान रंगनाथ की जय जयकार से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। हाथी मगरमच्छ की प्रतिकात्मक लड़ाई को देख श्रद्धालु अभिभूत हो गए। श्रावण पूर्णिमा पर्व पर दक्षिणात्य शैली के प्रसिद्ध रंगनाथ मंदिर में गज ग्राह लीला का मंचन किया जाता है। मान्यता है कि सतयुग में एक बार जलाशय में स्नान कर रहे गज ( हाथी) को जल के अंदर ग्राह( मगरमच्छ ) ने पकड़ लिया और जल के अंदर खींचने लगा। जब काफी प्रयास के बाद भी गज ग्राह की पकड़ से मुक्त नही हो पाया तो आर्तस्वर से भगवान रंगनाथ को पुकारा। अपने भक्त की कातर ध्वनि सुनकर भगवान रंगनाथ गरुण पर सवार होकर आए और सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर उसे मोक्ष प्रदान किया। मंदिर प्रबंधन द्वारा भगवान द्वारा भक्त की रक्षा के लिए की गई इस लीला प्रतिवर्ष मंचन किया जाता है। करीब 180 वर्ष से चल रही परंपरा का इस वर्ष भी निर्वहन किया गया। परंपरानुसार स्वर्ण निर्मित गरुण वाहन पर विराजमान होकर सुदर्शन चक्रधारी भगवान रंगनाथ की सवारी गर्भगृह से निकलकर मंदिर परिसर में भ्रमण कर पूर्वी द्वार स्थित पुष्करणी पर पहुंची। जहां गज एवम ग्राह के प्रतीक स्वरूप द्वारा लीला के उपरांत जैसे ही भगवान द्वारा ग्राह का वध किया गया। मंदिर परिसर रंगनाथ भगवान की जय जयकार से गूंज उठा। उसके बाद भगवान की कुंभ आरती की गई।
पुस्करिणी सरोवर में हुई लीला के बाद सवारी पुनःगर्भ गृह के लिए रवाना हो गई। इस अवसर पर मंदिर के पुरोहित विजय मिश्र ने बताया कि श्री रंगनाथ मंदिर में उत्सव की परंपरा है यहां हर दिन उत्सव होता है इसीलिए इसे दिव्यदेश कहा जाता है। यहां गज ग्राह की लीला का दर्शन मंदिर की स्थापना के साथ से ही चला आ रहा है।इंदौर से आईं भक्त अंजू ने बताया पहली बार यह लीला देखी बहुत अच्छा लगा। इस तरह की धार्मिक परम्पराओं को बच्चों को देखना चाहिए। जिससे वह सनातन धर्म के बारे में गहनता से जान सकें।
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Author: Vijay Singhal
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