हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा। दिल्ली, हरियाणा व पहाड़ों पर बारिश का असर मथुरा में भी यमुना के जलस्तर में देखने को मिल रहा है। एक सप्ताह में यमुना का जलस्तर 163.55 मीटर पर पहुंच गया है। यमुना किनारे रहने वाले लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं। दरअसल, खतरे का निशान 166 मीटर पर है। हालांकि प्रशासन ने अभी चिंता न करने की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में इंतजाम कर रखे हैं। खतरे से निशान से अभी यमुना 2.45 मीटर नीचे है। अपर आगरा कैनाल के गोकुल बैराज पर तैनात एक्सईएन सतीश कुमार ने बताया कि बीते एक सप्ताह की बात करें तो 30 सेंटीमीटर यमुना का जलस्तर बढ़ा है। पहले इसमें चार हजार क्यूसेक पानी था। वर्तमान में नौ हजार क्यूसेक पानी है। उन्होंने बताया कि पहाड़ी इलाकों, दिल्ली और हरियाणा सहित पश्चिम उप्र के जिलों में हो रही बारिश का यह असर है। उत्तराखंड में आई बाढ़ का पानी गंगा नहर में जा रहा है। उस पानी का यमुनोत्री के पानी से कोई मतलब नहीं है। बीते साल मथुरा में यमुना के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ आ गई थी। यमुना किनारे के वृंदावन, शहर के विश्राम घाट सहित अन्य घाट डूब गए थे। वृंदावन परिक्रमा मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। इसके अलावा शहर में भी द्वारिकाधीश मंदिर के आसपास के इलाकों की सड़कों पर पानी भर गया था। यमुना किनारे के गांव के घर और फसलें डूब गईं थीं। मांट क्षेत्र में भी काफी नुकसान हुआ था। बीते साल के इन दृश्यों को याद कर जनता सहमी हुई है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ के संबंध में बाढ़ स्टेयरिंग ग्रुप की बैठक हो चुकी हैं। इसमें निर्देश देकर बारिश के सीजन से पूर्व ही सभी इंतजाम, बचाव-राहत दल की तैनाती, बाढ़ से बचाव के संसाधन आदि जुटा लिए गए। यमुना का जलस्तर बढ़ा है। मगर, बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है।
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Author: Vijay Singhal
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