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यूपी में संकट, 4 हजार से ज्यादा रोहिंग्या:ज्यादातर ने फेक ID कार्ड बनवाए, शादियां की, बच्चे हुए की

ByVijay Singhal

Jul 25, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा। ATS ने यूपी के 6 शहरों से 74 रोहिंग्या मुसलमान को गिरफ्तार किया। यह अवैध तरीके से भारत में रह रहे थे। ATS के इस एक्शन के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया इनपुट है कि यूपी में अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या 3 से 4 हजार के करीब है। इसमें वेस्ट यूपी में इनकी तादाद करीब 2100 है। एजेंसियां की चिंता इस बात की है कि पकड़े गए कई रोहिंग्या 10-15 साल से यहां रह रहे हैं। कई ने यहीं का राशन कार्ड और दूसरे डॉक्यूमेंट तक बनवा लिए हैं। ऐसे में उनकी पहचान कर पाना भी मुश्किल हो रहा है। झुग्गी-झोपड़ियों से शुरू हुई उनकी जिंदगी आज पक्के मकान तक पहुंच गई है। गिरफ्तार किए रोहिंग्या से ATS की पूछताछ में कई और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कई रोहिंग्या बचपन में ही भारत आ गए, अब जवान हो गए। यहीं शादियां की और बच्चे हो गए। कुछ रोहिंग्या ने बताया कि भारत में एंट्री दलाल के जरिए पश्चिम बंगाल के बॉर्डर से अवैध तरीके से हुई। इसके लिए उन्होंने 50 हजार से 1 लाख रुपए तक दलालों को दिए। मथुरा में 31 रोहिंग्या पकड़े हैं। इनमें 29 पुरुष और 2 महिलाएं हैं। ये सभी आगरा-दिल्ली नेशनल हाईवे पर गांव अल्लाहपुर और कोटा के पास बड़ी झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। जांच में सामने आया है कि यहां करीब 300 रोहिंग्या रह रहे हैं। ये सभी म्यांमार के रहने वाले हैं।पूछताछ में यह भी पता चला कि इन रोहिंग्या में से कुछ ने यहां एक खेत किराए पर ले रखा है। ज्यादातर रात में कबाड़ बीनने का काम करते हैं। एटीएस सूत्रों ने बताया कि इन लोगों से पूछताछ में एक जैसी बात ही सामने आई हैं। इन लोगों ने बताया कि दलाल ने उन्हें पश्चिम बंगाल के बॉर्डर से अवैध रूप से भारत में एंट्री कराई थी। इसके बदले वह 50 हजार से 1 लाख रुपए लिए थे। सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर रोहिंग्या समय-समय पर रहने की जगह बदलते रहते हैं। मथुरा की झुग्गी-झोपड़ी में भी 1 साल पहले कुछ लोग आए और धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती रही। जब इन पर शक हुआ, तो 31 लोगों को गिरफ्तार किया गया। डॉक्यूमेंट चेक किए, तो सिर्फ 9 लोगों के पेपर सही मिले। पुलिस का कहना है कि पुलिस के पहुंचने से पहले कुछ लोग चले गए थे। उनका पता लगाया जा रहा है। इस बस्ती में बाकी लोगों के कागज भी चेक किए जा रहे हैं। अलीगढ़ में जिन 7 रोहिंग्या मुसलमान को गिरफ्तार किया गया है। वो कोई एक दो साल पहले नहीं आए, बल्कि उन्हें यहां आए एक दशक से ज्यादा हो चुके हैं। इसमें कुछ ऐसे भी थे, जो 5-7 साल की उम्र में आए थे और आज यह युवा हो चुके हैं। कुछ की तो शादी हो चुकी है और उनके पत्नी और बच्चे भी हैं। इनके बच्चों का जन्म अलीगढ़ में ही हुआ है कोतवाली क्षेत्र से पकड़े गए 20 साल के रोहिंग्या शैदुलरहमान ने बताया कि वह 13 साल पहले अपनी मां के साथ भारत आया था। देर रात में दलाल ने उन्हें बॉर्डर पार कराया। उस समय वह काफी छोटा था और बॉर्डर पार करके म्यांमार से भारत में आया था। उसके साथ में दूसरे बड़े लोग थे, जो उन्हें लेकर अलीगढ़ आए थे। यहां आने के बाद बड़े लोगों ने उन्हें यहां पर छोड़ दिया और खुद आगे चले गए। रोहिंग्याओं ने बताया कि उन्हें यहां पर रहते हुए 10-15 साल हो गए हैं। उन्होंने एक दशक पहले खुद की जान बचाने के लिए बॉर्डर पार किया था। उस समय म्यांमार में लड़ाई चल रही थी और रोज गोलाबारी होती थी। इसमें उनके कई लोगों की जानें भी चली गई थी। इसी से बचने के लिए उन्होंने अपना देश छोड़ना ही मुनासिब समझा और चोरी छिपे बॉर्डर पार करके भारत में आ गए। इसके बाद गाड़ियों और ट्रकों में बैठाकर उन्हें अलग-अलग जिलों में भेज दिया गया। रोहिंग्या ने बताया कि उन्होंने छिप छिपाकर बॉर्डर पार किया था। करीब 13 साल पहले वह जब अलीगढ़ आए तो उस समय उनके साथ 300 परिवार अलीगढ़ आए थे। काफी समय तक यह सभी अलीगढ़ में ही रहे। लेकिन, इसके बाद धीरे-धीरे यह अलीगढ़ से दूसरे जिलों की ओर चले गए। यहां से जाने वाले परिवार इस समय कहां है? इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यहां कुल 22 परिवार बचे हैं। ATS और पुलिस ने कोतवाली क्षेत्र के मकदूम नगर से रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कुछ यहां पर किराए के मकान में रह रहे थे, तो कुछ ने सड़क के किनारे ही झोपड़ियां बना रखी थी। यह सभी सुबह मजदूरी करने के लिए निकलते हैं और शाम को अपनी झोपड़ियों और घर पर वापस आ जाते थे। रोहिंग्या विभिन्न फैक्ट्रियों में मजदूरी करते हैं और इसी से अपना भरण-पोषण करते हैं। लेकिन शुरू से ही रोहिंग्या या बांग्लादेशियों की पहली पसंद मीट फैक्ट्री रही है। यह मीट फैक्ट्रियों और स्लाटर हाउस में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। स्लाटर हाउस में भी इन्हें आसानी से काम मिल जाता है, क्योंकि लोकल लोगों की तुलना में यह कम रुपए में काम करते हैं और संचालक इनसे काम भी ज्यादा लेते हैं। इसलिए इनके लिए सबसे मुफीद जगह हमेशा से स्लाटर हाउस ही रही है, जहां पर यह लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए काम करते हैं। रोहिंग्या परिवार पकड़े जाने के बाद पुलिस अब एक्टिव हो गई है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। संदिग्ध इलाकों में पुलिस की टीमें लगा दी गई हैं। इसके साथ ही जिन फैक्ट्रियों और स्लाटर हाउस में यह सभी काम करते हैं, वहां का भी रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। जिससे कि अलीगढ़ में अगर और परिवार अवैध तरीके से रह रहे हैं, तो उनका पता लगाया जा सके। इसके साथ ही यहां से जाने वाले परिवारों के बारे में भी पता लगाने के लिए पुलिस टीमें काम कर रही हैं। ATS ने सहारनपुर से दो रोहिंग्या मुसमानों को गिरफ्तार किया। एक नाम अनवर सादिक है। यह हलवाईयान मस्जिद के पास किराए के मकान में रह रहा था। अनवर स्लॉटर हाउस में काम कर रहा था। जबकि दूसरे का नाम कैफितुल्ला है। यह एकता कॉलोनी में रह रहे थे। यह कबाड़ का काम का रहा था। दोनों 10 साल से सहारनपुर में रह रहे थे। दोनों ने प्लाट भी खरीद लिए थे। अब मकान बनाने की तैयारी थी। उसके बाद परिवार को लाने की बात बताई है। एटीएस को इनपुट था कि यूपी में स्लाटर हाउस में ज्यादातर रोहिंग्या मुसलमान काम करते हैं। इन जगहों पर बदबू बहुत होती है। इस कारण गैर मुस्लिम वहां पर जाने से कतराता है। इसी का फायदा इन्हें मिलता है। वहीं] कुछ रोहिंग्या कबाड़ी का काम करते हैं। सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर रोहिंग्या छोटी-मोटी चोरी, लूटपाट, हत्या और डकैती जैसे अपराधों में शामिल हैं। रोहिंग्या एक स्टेटलेस या राज्यविहीन जातीय समूह है। यह इस्लाम को मानते हैं और म्यांमार के रखाइन प्रांत में बड़ी संख्या है। 1982 में बौद्ध बहुल देश म्यांमार ने रोहिंग्या की नागरिकता छीन ली थी। इससे उन्हें शिक्षा, सरकारी नौकरी समेत कई अधिकारों से अलग कर दिया गया। तब से म्यांमार में रोहिंग्या के खिलाफ हिंसा जारी है। 2017 में हुए रोहिंग्या के नरसंहार से पहले म्यांमार में उनकी आबादी करीब 14 लाख थी। 2015 के बाद से म्यांमार से 9 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी भागकर बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान समेत आसपास के अन्य देशों में जा चुके हैं। अकेले बांग्लादेश में रोहिंग्या की संख्या 13 लाख से ज्यादा है।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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