हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मानसून देहरी पर खड़ा है, लेकिन नाले की सफाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। शहर के कई इलाकों में नालों की सफाई का काम अभी भी अधर में लटका हुआ है, जहां तलीझाड़ सफाई अधर में लटकी हुई है। हालांकि कागजों में अधिकांश नालों की सफाई का दावा किया जा रहा है। चंदनवन, महोली, नरहौली समेत के क्षेत्रों में स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां नाले कचरे और सिल्ट (कीचड़) से पूरी तरह पटे पड़े हैं। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। चंदनवन निवासी रमेश कुमार ने बताया, हल्की बारिश में ही हमारे क्षेत्र की सड़कें तालाब बन जाती हैं। इस बार तो अभी तक नालों से कचरा निकाला ही नहीं गया है। अगर भारी बारिश हुई तो पानी लोगों के घरों में घुस जाएगा। यही हाल महोली क्षेत्र का भी है। यहां के मुख्य नालों में पॉलीथिन, प्लास्टिक की बोतलें और ठोस कचरे से अटे पड़े हैं। जलभराव के कारण न बल्कि संक्रामक बीमारियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने का डर भी स्थानीय लोगों को सता रहा है। यदि अगले एक या दो सप्ताह में युद्ध स्तर पर इन नालों की गाद नहीं निकाली गई तो पहली ही मूसलाधार बारिश में सिस्टम की पोल खुल जाएगी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी रामगोपाल ने बताया कि 15 दिवसीय स्वच्छता अभियान के तहत सफाई का कार्य जारी है। जहां-जहां से शिकायतें मिल रहीं, वहां युद्ध स्तर पर नाले-नालियों की सफाई कराई जा रही है। ताकि मानसून में बारिश के दौरान जलभराव न हो।
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Author: Vijay Singhal
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