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व्रन्दावन में पुल का काम रुका पर खादर में अवैध निर्माण जारी

ByVijay Singhal

Jan 19, 2024
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मथुरा। वृंदावन में वर्ष 2010 में यमुना पर बन रहे अर्धचंद्राकार पुल का निर्माण कार्य यमुना के अस्तित्व पर खतरे का हवाला देकर उच्च न्यायालय के आदेश पर रुकवा दिया गया, लेकिन पिछले 14 सालों में खादर क्षेत्र में अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग सकी है। खादर में दो दर्जन से अधिक अवैध कॉलोनियां बस गईं हैंं और अब भी धड़ाधड़ निर्माण जारी है। वृंदावन की समग्र विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने चीरघाट से वंशीवट तक अर्धचंद्राकार पुल का निर्माण शुरू कराया था। पर्यावरण प्रेमियों ने इसे यमुना के अस्तित्व के लिए खतरा बताया। महंत मधुमंगल शरण शुक्ल की जनहित याचिका पर 21 जनवरी 2010 में हाईकोर्ट ने इस कार्य पर स्टे ऑर्डर दे दिया। हालांकि तब तक सेतु निगम ने नदी के बीच 11 पिलर का सेतु बना दिया था। इसके बाद लगभग एक करोड़ रुपए खर्च कर सभी पिलरों को हटवा दिया और पुल नहीं बन सका, लेकिन पिछले 14 वर्षों में यमुना के रिवर बैड एवं खादर में लगातार अवैध कॉलोनियां बनाने का सिलसिला जारी है। वृंदावन के एक छोर बराह घाट से लेकर पुराने घाटोें को पार कर यमुना किनारे अक्रूर घाट तक करीब दस किमी में दो दर्जन से अधिक काॅलोनियां बन गई हैं। वर्तमान में भी देवराह घाट और अक्रूर घाट के पास अवैध काॅलोनी बन रही है। प्रतिदिन यमुना खादर में जमीनों की रजिस्ट्री हो रही हैं और बहुमंजिला मकान, आश्रम, गेस्टहाउस बन रहे हैं, जबकि हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण टंडन ने दिसंबर 2017 में यमुना किनारे मकानों के निर्माण नाराजगी जाहिर की और जिला प्रशासन को 15 दिन में मकान तोड़ने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद न ही खादर की जमीन की बिक्री पर रोक लगी और न ही इमारतों के निर्माण पर रोक लगी। यमुना विहार कॉलोनी निवासी पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि खादर में बने मकानों को टूटने से बचाने का रास्ता आगरा से होकर प्रयागराज तक जाता है। यानी पहले जमीन को लेकर मंडलायुक्त के यहां वाद डाला गया। इसके बाद हाईकोर्ट से आसानी से मंडलायुक्त के यहां वाद लंबित होने की बात पर स्टे ऑर्डर मिल जाता है। इस तरह के 150 से अधिक प्रार्थना पत्र मंडलायुक्त के पास और हाईकोर्ट में हैं। यमुना खादर में शासन और प्रशासन की ओर से जमीन की बिक्री और निर्माण पर रोक न होने से इस क्षेत्र में जमीनों की कीमत हर दिन बढ रही है। 14 साल पहले इस इलाके में जमीनों की कीमत पांच सौ रुपए वर्ग गज थी, जो अब 10 से 20 हजार प्रति वर्गगज तक पहुंच गई है। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के जेई प्रवर्तन सुनील कुमार राजोरिया ने बताया कि वृंदावन क्षेत्र में खादर में बन रही अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया जा रहा है। सूची बनाई जा रही है। चिह्नीकरण के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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