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BHU छात्र को भाया वृंदावन, ‘नृत्य मंजरी दास’ के बिहारी जी की भक्ति में ऐसे कदम थिरके कि बन गए कत्थक डांसर

ByVijay Singhal

May 21, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृन्दावन घूमने आए बीएचयू के एक छात्र को कृष्ण की नगरी इतनी भा गई कि वह पिछले नौ साल से यही पर रह रहा है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का छात्र वृन्दावन में रहकर भक्ति कर रहा है। छात्र आशीष मूल रूप से बनारस के रहने वाले हैं और कृष्ण की क्रीड़ा स्थली में भक्ति के साथ-साथ कत्थक नृत्य का रियाज करते हैं। देश-विदेश के दर्जनों छात्र-छात्राएं कत्थक नृत्य की बारीकियां आशीष से सीख रही हैं। यूं कहें विदेशियों को कत्थक नृत्य बेहद भा रहा है। महादेव की नगरी काशी का रहने वाला BHU का छात्र वृन्दावन दर्शन के लिए करीब नौ साल पहले आया। धर्म नगरी में आने के बाद हर मंदिर में उसने अपना मत्था टेका। छात्र आशीष मीरा बाई की कृष्ण भक्ति से प्रभावित हो गए। आशीष को कत्थक नृत्य में शुरू से ही रुचि रही। कत्थक में आशीष ने देश-विदेश में ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। वृन्दावन के मीरा बाई मंदिर में आशीष कत्थक का रियाज करने हर दिन आते हैं। आशीष से वृन्दावन आने और कत्थक नृत्य को लेकर बात गई कि तो उन्होंने बताया कि सन् 2015 में पिता चन्द्र कुमार सिंह जी के जाने के बाद वह निरंतर श्रीमद्भागवत महा पुराण सुनते रहे और मन में जिज्ञासा हुई की एक बार वृन्दावन जाना है। वर्ष 2016 में वृंदावन आए और उनका मन ऐसा अटक गया कि बाकी की जिंदगी यही गुजारने का मन बना लिया। उनको कत्थक कार्यशाला लेने का भी मौका मिल गया। मथुरा में फिर उसी समय उन्होंने वृंदावन में एक आश्रम में अपने रहने की व्यवस्था कर ली, जिसमें उनकी मदद बनारस की बसंत कन्या महाविद्यालय की सुशीला देवी ने की। फिर क्या था आशीष लग गए कृष्ण भक्ति में और भक्त शिरोमणि मीराबाई की तरह अपना कत्थक नृत्य का रियाज करना शुरू किया, जो वर्ष 2016 से शुरू किया और आज तक चल रहा है। आशीष कत्थक को अपना जीवन मानते हैं। वृन्दावन में आकर उन्होंने भक्ति के साथ कत्थक का भी रियाज करना शुरू किया। जैसे-जैसे लोगों को इनके बारे में पता चला लोग इनसे जुड़ते चले गए। आशीष बताते हैं कि उन्होंने वृन्दावन, मथुरा के साथ-साथ विदेशी महिलाओं को भी कत्थक नृत्य सिखाया। दर्जनों विदेशी उनके छात्र बनकर कत्थक सीख चुके हैं।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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