हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में अक्षय तृतीया पर जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के चरण और सर्वांग दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों की भीड़ का रेला इस कदर था कि मंदिर के बाहर से तीन किलोमीटर लंबी कतार लग गई। वहीं भीड़ के दबाव के कारण विद्यापीठ चौराहे पर लगाई गई बैरिकेडिंग दोपहर में टूट गई। जिन भक्तों को सुबह दर्शन नहीं हो पाए वह गलियों में ही बैठ गए और शाम को दर्शन किए। खुफिया विभाग के मुताबिक अक्षय तृतीया पर लगभग 5 लाख से अधिक भक्तों ने ठाकुरजी के दर्शन किए। सुबह पांच बजे से ही मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर श्रद्धालुओं ने डेरा डाल दिया। विद्यापीठ चौराहे पर लगी बैरिकेडिंग में भक्तों की लाइन लग गई। तय समय 7:45 से लगभग डेढ़ घंटे पूर्व 6:15 बजे मंदिर के पट खुल गए। इसके बाद भक्तों का रेला मंदिर की ओर बढ़ने लगा। गलियों में भी भीड़ का दबाव बढ़ गया। संपूर्ण मंदिर प्रांगण ठाकुर बांकेबिहारी लाल के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। सुगंधित इत्र और पुष्पों से महकता मंदिर परिसर श्रद्धालुओं में बरबस ही आध्यात्मिक भावना का संचार कर रहा था। मंदिर परिसर को पीले रंग के गुब्बारों से सजाया गया था। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज को मंदिर सेवायतों ने विगत दिनों से तैयार किए जा रहे चंदन श्रंगार में चंदन के साथ केसर, कर्पूर का लेप लगाकर ठंडक का अहसास कराया। देश और विदेशों से आए श्रद्धालु ठाकुरजी के चंदन प्रसाद को लेकर अपने को धन्य मान रहे थे। दोपहर 12 बजे राज भोग आरती से पहले मंदिर परिसर और मंदिर के बाहर भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि विद्यापीठ चौराहे पर लगाई गई बैरिकेडिंग ध्वस्त हो गई। यहां तैनात पुलिसकर्मियों ने भीड़ के दबाव को संभाला।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सुरक्षा के लिए भारी पुलिसबल तैनात किया गया। सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद, माला और सामान की तलाशी के बाद ही अंदर जाने दिया गया। इसके साथ ही नगर के प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे।
ठाकुर बांकेबिहारी को गर्मी से राहत देने के लिए शीतल पदार्थों का प्रसाद निवेदित किया गया। ठाकुरजी को सत्तू, खरबूजा, मेवा युक्त ठंडाई के अलावा केसरिया छैना खीर, ककड़ी और शर्बत का प्रसाद लगाया गया। शाम के समय भी भगवान के सर्वांग दर्शन हुए। इस दौरान बांकेबिहारीजी के चरणों में चंदन से बना लड्डू अर्पित किया। बांकेबिहारी को पायजेब भी धारण कराई गई। भक्तों ने सेवायतों के माध्यम से ठाकुरजी को सोने और चांदी की पायजेब धारण कराई। मंदिर सेवायत श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि इस दिन विवाह योग्य युवतियां भगवान बांकेबिहारी को पायजेब अर्पित करती हैं और अपने सुखी विवाहित जीवन की कामना करती हैं। इधर अक्षय तृतीय पर्व पर अक्षय पुण्य प्राप्ति की कामना से विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा नगर में विभिन्न स्थानों पर शीतल जल एवं शर्बत की प्याऊ लगाई गईं। बांकेबिहारी के दर्शन के लिए आए भक्तों ने कष्टों को दरकिनार कर आराध्य के दर्शन किए। पंजाब से आए सोन और रेनू ढाई घंटे तक लाइन में लगकर ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के लिए पहुंचे और कृतार्थ हुए। वहीं अलवर की रहने वाली माया और शिल्पी गुप्ता सुबह 10 बजे लाइन में लगीं, लेकिन जब तक वह मंदिर के गेट तक पहुंचीं 12 बजे की आरती के बाद दर्शन बंद हो गए। दोनों निराश थीं, लेकिन आराध्य के प्रति उनकी श्रद्धा देखिए शाम तीन बजे से बांकेबिहारी के दर्शन के लिए लाइन में लग गईं बाद में उन्हें ठाकुरजी के दर्शन मिले।
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Author: Vijay Singhal
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