हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में जिस घाट का नाम सुनते ही मन में दिव्यता, सुंदरता और आस्था का भाव जागृत हो जाता है आज वही शृंगार घाट प्रशासनिक उदासीनता और प्रदूषण का उदाहरण बन गया है। द्वापर युग में जिस कालिंदी (यमुना) के तट पर श्रीकृष्ण और राधारानी ने लीलाएं कीं, आज वही स्थल अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। शृंगार घाट पर यमुना का स्वरूप देखकर आस्थावानों का दिल बैठ जाता है। यहां पवित्र जल की जगह जहरीला पानी और चारों तरफ गंदगी का अंबार दिखाई देता है। शृंगार घाट के पास गंदे नाले यमुना में गिर रहे हैं। सीवर का गंदा पानी और कचरा कालिंदी के आंचल को मैला कर रहा है। स्थिति इतनी बदतर है कि घाट के किनारे खड़ी नावों के बीच प्लास्टिक, सड़े-गले फूल और कूड़े-कचरे के ढेर लगे हैं। श्रद्धालु जब यहां आचमन और स्नान के लिए आते हैं, वे पानी की दुर्गंध और काला रंग देखकर बिना स्नान किए ही लौटने को मजबूर हो जाते हैं। यमुना में गंदगी शर्म की बात है। वह तो हर बार यह बात प्रशासन के सामने उठाते हैं। घाटों पर बनी दुकानों के कारणों वहां गंदगी हो रही है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। सीपी पाठक, अपर नगरायुक्त ने कहा, नगर निगम लगातार सफाई चलाता है। घाट पर यह स्थिति है तो टीम को लगाकर सफाई कराई जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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