हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिघल
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह की रिवीजन याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने 20 मार्च की तारीख दे दी है। 20 मार्च को न्यायालय सभी पक्षों को सुनकर फैसला दे सकता है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने शाही ईदगाह का सर्वे कराए जाने को लेकर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में वाद दाखिल किया था। निचली अदालत द्वारा यह वाद खारिज कर दिया गया। इसके बाद वादी ने जिला जज की कोर्ट में रिवीजन वाद दाखिल किया। जिला जज की अदालत ने इस केस को सुनने के लिए एडीजे 6th की कोर्ट में भेज दिया था। एडीजे 6th की कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट अब इस मामले में फैसला सुना सकती है। महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि रिवीजन के मामले में ऑर्डर रिजर्व था। पिछली 8 फरवरी को दोनों तरफ से बहस हो चुकी थी। कोर्ट कमीशन का ऑर्डर न्यायालय निचली कोर्ट को करे यह मांग की गई थी। क्योंकि शाही ईदगाह का कोर्ट कमीशन द्वारा सर्वे करना नितांत आवश्यक है। महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि इसके लिए जितने सबूत हैं वह सभी कोर्ट को दिए हैं। हिंदू पक्षकारों ने ये आरोप लगाया है कि मुस्लिम पक्ष के लोग शाही ईदगाह परिसर का विस्तार कर रहे हैं। वहां मौजूद कथित सबूतों को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में मस्जिद का सरकारी अमीन की मदद से सर्वे कराया जाए। इस अपील का मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में विरोध किया। 23 फरवरी को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। दरअसल, श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि शाही ईदगाह परिसर में कुछ लोग गुपचुप तरीके से विस्तार कर रहे हैं। पुराने साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकारी अमीन की मदद से परिसर का भौगोलिक सर्वे कराया जाए। ताकि सबूतों को सुरक्षित रखा जा सके। इस मामले में महेंद्र प्रताप सिंह ने जिला जज की अदालत में रिवीजन वाद दाखिल किया था। जिला जज ने रिवीजन दावे की एडीजे 6th की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था। 23 फरवरी को भी एडीजे 6th की कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इस दौरान सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने भी कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने बहस को पूरा माना और मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने तय किया कि इस पर फैसला 10 मार्च को सुनाया जाएगा। इस फैसले के आने के बाद इस पर स्थिति साफ हो जाएगी कि मामले में सरकारी अमीन के द्वारा मस्जिद का भौगोलिक सर्वे कराया जाएगा या नहीं? कोर्ट कमीशन का ऑर्डर न्यायालय निचली कोर्ट को करेगी।
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Author: Vijay Singhal
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