हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। नौहझील की यमुना नदी के जलस्तर में हुई अचानक बढ़ोतरी से नौहझील क्षेत्र में एक बार फिर संकट के बादल छाने लगे हैं। लगातार तीसरे साल उफनती यमुना का पानी तटीय इलाकों में घुसने लगा है। नदी का पानी नौहझील-फिरोजपुर मुख्य मार्ग तक पहुंच गया। क्षेत्र के करीब छह दर्जन से ज्यादा गांवों के ग्रामीण सहमे हुए हैं। यमुना के तटीय गांवों अड्डा मीणा, फिरोजपुर, अड्डा जाटव, मांगरखोर, छिनपारई, अड्डा मल्हान, मंडारी, बरौठ, बाघर्रा, रायपुर, नानकपुर, भैरई, मुसमुना, मुकदुमपुर, खुशलागढ़ी, अनर्दागढ़ी, अड्डा पिथौरा, भगवानगढ़ी, तिलकागढ़ी, जाफरपुर, इनायतगढ़, दौलतपुर, देदना, बसाऊ, मुक्खा मरहला, भूरगढ़ी, पालखेड़ा, पिथौरा और फरीदमपुर समेत दर्जनों गांवों के ओर पास पानी आ चुका है। खेतों में खड़ी धान, ज्वार और बाजरे की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं। जलभराव के कारण किसानों की खून-पसीने की कमाई बर्बाद होती दिखाई दे रही है। उधर पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो गया है। कागजों में राहत चौकियां, धरातल पर कुछ नहीं एक ओर उफनती यमुना ग्रामीणों को डरा रही है वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक दावों की हवा निकलती दिख रही है। शासन द्वारा आपदा से निपटने के लिए झाड़ी हनुमानजी मंदिर नौहझील, गांव बाघर्रा और गांव अड्डा मल्हान में तीन बाढ़ राहत चौकियां बनाने के दावे किए गये हैं, लेकिन चौकियां खाली पड़ी हैं। वहां कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं है। नायब तहसीलदार जितेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी ड्यूटी पूर्व राष्ट्रपति के आगमन के चलते लगी हुई थी। रविवार से तीनों राहत चौकियों पर टीम तैनात कर व्यवस्थाएं सुचारू की जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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