हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। किशोरी रमण पीजी कॉलेज में प्राचार्य पद पर हुई नियुक्ति विवादों में घिर गई है। डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल पर फर्जी अभिलेख लगाने और सेवा अवधि में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति को पूरे मामले की जांच कर दो सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी है।
शिकायतकर्ता डॉ. यदुराज सिंह यादव की ओर से प्रस्तुत शपथ-पत्र और शिकायत के आधार पर शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा), प्रयागराज ने जांच के आदेश जारी किए। आरोप है कि प्राचार्य पद पाने के लिए वास्तविक तथ्यों को छिपाया गया। अवैतनिक अवकाश को भी अनुभव में जोड़कर अर्हकारी सेवा अवधि पूरी दिखाई गई। इसके अलावा शोध निर्देशन, पीएचडी पर्यवेक्षण और एपीआई अंकों से जुड़े दस्तावेजों में भी विसंगतियों के आरोप हैं। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित समिति में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, अलीगढ़ को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (नैनी, प्रयागराज) के सहायक आचार्य डॉ. विपिन तिवारी इसके सदस्य हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मथुरा ने भी 12 मई 2026 को नगर मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्र को समिति में सदस्य नामित कर दिया है। किशोरी रमण (पीजी) कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने अपने खिलाफ उच्च शिक्षा विभाग में हुई शिकायत और जांच पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने मूल वैधानिक दस्तावेज और पूर्व की क्लीन चिट रिपोर्ट पेश करते हुए उन्होंने इसे छवि धूमिल करने का सुनियोजित भ्रामक दुष्प्रचार बताया। डॉ. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और निदेशालय की त्रिसदस्यीय समिति पहले ही इन आरोपों की गहन जांच कर उन्हें दोषमुक्त कर चुकी है। वहीं, शोधार्थी के निर्देशन के आरोप पर उन्होंने कहा कि उनके पास आरडीसी और वाइवा के सभी सुरक्षित अभिलेख हैं, वैसे भी विज्ञापन में पीएचडी निर्देशन की अनिवार्यता समाप्त थी। प्राचार्य ने कहा कि व्यक्तिगत द्वेषवश कॉलेज की छवि प्रभावित करने की कोशिश हो रही है, जबकि शैक्षणिक व विकास कार्य सामान्य चल रहे हैं। उन्हें प्रशासनिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।
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Author: Vijay Singhal
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