हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में स्थित उत्तर भारत के विशालतम रंगनाथ मंदिर में चल रहे बैकुंठ उत्सव के सातवें दिन माखन चोर लीला के दर्शन हुए। भगवान लड्डू गोपाल और माता गोदा जी चांदी की पालकी में विराजमान हो कर निज मंदिर से निकली और फिर बैकुंठ लोक का भ्रमण किया। उत्तर भारत के विशालतम रंगनाथ मंदिर में 11 दिवसीय बैकुंठ उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस उत्सव के प्रथम दिन बैकुंठ एकादशी के अवसर पर वर्ष में एक बार भगवान रंगनाथ ब्रह्म मुहूर्त में बैकुंठ दरवाजा से निकलते हैं। इसके बाद दस दिन तक भगवान रंगनाथ माता गोदा जी के साथ भगवान राम और कृष्ण की विभिन्न लीलाओं के स्वरूप में शाम को दर्शन देते हैं। बैकुंठ उत्सव के सातवें दिन भगवान की सवारी चांदी की पालकी में विराजमान हो कर निज मंदिर से निकली। परंपरागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच भक्त पालकी को लेकर बैकुंठ द्वार पर पहुंचे। जहां भगवान की कपूर आरती की गई। इसके बाद पालकी पर विराजमान भगवान लड्डू गोपाल और गोदा जी को मंदिर में भ्रमण कराया गया।
मंदिर भ्रमण करते हुए भगवान की पालकी मंदिर परिसर में पौंडानाथ मंदिर यानी बैकुंठ लोक पहुंची। यहां भक्तों ने भगवान को बैकुंठ लोक के पांच चक्कर लगवाए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भगवान रंगनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पालकी में विराजमान लड्डू गोपाल माखन चोरी करते हुए भक्तों को दर्शन दे रहे थे तो माता श्री गोदा जी उनको पकड़ने का प्रयास करते हुए दर्शन दे रहीं थी। बैकुंठ लोक की परिक्रमा के दौरान भक्तों ने भगवान के प्रति अपनी आस्था जताते हुए भजन प्रस्तुत किए। भक्त भगवान के समक्ष एक के बाद एक भजन गा रहे थे तो वहीं कुछ भक्त झूमने लगे। इस दौरान भक्त भगवान की जय जयकार कर रहे थे। बैकुंठ लोक की 5 परिक्रमा करने के बाद भगवान की सवारी को 15 मिनट के लिए विश्राम कराया गया।
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Author: Vijay Singhal
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