हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। किसी व्यक्ति या व्यवसाय के पास मौजूद अमूर्त सम्पत्तियों से जुड़े सभी अधिकार जोकि ऐसी सम्पत्तियों को गैरकानूनी उपयोग या शोषण से बचाए जा सकें, बौद्धिक सम्पदा अधिकार कहलाते हैं। ऐसे अधिकार बौद्धिक सम्पदा के रचनाकारों को दिए जाते हैं, ताकि उनकी रचनाओं का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना कोई दूसरा न कर सके। बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का उपयोग किसी निश्चित समय अवधि के लिए निर्दिष्ट सम्पत्ति या वस्तुओं के उपयोग पर धारक के एकाधिकार को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इन अधिकारों का उल्लंघन दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यह बातें सोमवार को जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) और नवप्रवर्तकों व उद्यमियों के लिए इसकी महत्ता विषय पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि बौद्धिक सम्पदा अधिकार विशेषज्ञ पूजा कुमार ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
मुख्य अतिथि पूजा कुमार ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आईपी को पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क द्वारा कानून के दायरे में लाते हुए संरक्षित किया जाता है, जो लोगों को उनके द्वारा आविष्कार, निर्माण से मान्यता या वित्तीय लाभ अर्जित करने में सक्षम बनाता है। सत्र की शुरुआत मुख्य अतिथि पूजा कुमार के स्वागत से हुई। उन्होंने आईपीआर के विभिन्न पहलुओं जैसे परिभाषा, क्षेत्र, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, पेटेंट, व्यापारिक रहस्य आदि की विस्तार से जानकारी दी। अंत में आईआईसी के उपाध्यक्ष डॉ. शशि शेखर ने मुख्य अतिथि पूजा कुमार को एक स्मृति चिह्न और आईआईसी के संयोजक बृजेश कुमार उमर ने उन्हें एक पौधा भेंटकर आभार माना। सत्र का समापन डॉ. शशि शेखर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। डॉ. शशि शेखर ने कहा कि जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा का आईआईसी ऐसे प्रयासों का नेतृत्व करता है, जोकि छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों को नवाचार की दुनिया में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाते हैं।
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Author: Vijay Singhal
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