हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गिरिराज कहे जाने वाले गोवर्धन पर्वत को महाभारत काल का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) की खुदाई में मिले प्रमाण महाभारत काल को और पुख्ता कर रहे हैं। यहां मिली शिव पार्वती की प्राचीन प्रतिमा के अलावा ऐसे कई प्रमाण मिले हैं जो इस खुदाई को विशेष बना रहे हैं। अब टीम यहां अन्य बिंदुओं पर काम करेगी। डीग जिले के बहज गांव में एएसआई ने गोवर्धन पर्वत की खुदाई कर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। दरअसल इस पर्वत को कृष्णकालीन यानी महाभारत के समय का बताया जाता है। पौराणिक कथाओं की मानें तो भगवान श्रीकृष्ण इसी पर्वत पर अपनी गायों को चराया करते थे। यहां उन्होंने कई लीलाएं रचीं जिनमें देवताओं के राज इंद्र का घमंड चूर करने की लीला सबसे प्रमुख कही जाती है। इंद्र का दर्प चूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने इसे अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसी काल के साक्ष्यों को जुटाने की एएसआई कवायद कर रहा है। यहां खुदाई में 4800 साल पुरानी गणेश्वर सभ्यता के बर्तनों का मिलना हो या फिर तीन हजार साल पुरानी शिव पार्वती की प्रतिमा, सभी इस काल को प्रमाणित करने की तरफ इशारा कर रही हैं। पौराणिक गणना के अनुसार हाल ही में भगवान श्रीकृष्ण का 5251 वां जन्म दिवस मनाया गया था। यानी यह प्रमाण भी इसी काल का होने का इशारा कर रहे हैं। जयपुर सर्किल के पुरातत्वविद़ों के मुताबिक मुताबिक पूरा ब्रज क्षेत्र ही भारतीय संस्कृति की धरोहर है। ऐसे में यहां मिले प्रमाण वास्तव में पुरातन संस्कृति को मजबूती से प्रतिबिंबित करते हैं। गोवर्धन पर्वत टीले पर खुदाई में मिले यज्ञ कुंड, सिक्के, धातु के औजार, मौर्यकालीन मातृदेवी प्रतिमा का सिर तो शुंग कालीन अश्विनी कुमारों की मूर्ति फलक आदि बेहद महत्वपूर्ण हैं। शुंग काल के हड्डी के बने टूल्स, हाथियों पर सवार देवताओं के चित्रों वाली मिट्टी की मुहरें, चित्रित ग्रे वेयर संस्कृति (आज से करीब 1100 और 800 ईसा पूर्व) से एक दुर्लभ टेराकोटा पाइप सभी अपने आप में विशेष है। एएसआई की टीम ने अब अपनी खुदाई का दायरा बढ़ा दिया है। जनवरी माह में खुदाई में जो अवशेष मिले थे उसका अध्ययन किया गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अब इस साइट को और विस्तृत किया गया है। यहां टीम अभी खुदाई जारी रखेगी। माना जा रहा है कि कुछ अन्य प्रमाणों की कार्बन डेटिंग होगी तो अहम सफलता हाथ लगेगी।
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Author: Vijay Singhal
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