हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छाता तहसील के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में बैंक के बकाएदार की एसडीएम द्वारा कुर्क जमीन का भी बैनामा कर दिया गया, जबकि जमीन बैंक कर्ज होने पर बंधक थी। मामला संज्ञान में आने के बाद प्रशासन में खलबली मच गई है। अधिकारी मामले में पत्रावली खंगालने में जुटे हैं। मामला छाता तहसील क्षेत्र के गांव सेही बांगर से संबंधित है। खसरा संख्या 1387, 1388, 1396 से संबंधित 7560 वर्गमीटर भूमि में पांच खातेदार हैं। खातेदारों को यह जमीन अनुसूचित जाति का होने का चलते प्रशासन ने पट्टे पर दी थी। बाद में ये भूमि संक्रमणीय हो गई। इन्हीं में से एक खातेदार जसरथ पुत्र लाल सिंह ने कोसीकलां की सेंट्रल बैंक से भूमि को बंधक बनाते हुए 2007 में 4.30 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण न चुका पाने की स्थिति में 28 जनवरी 2014 को बैंक ने तहसील प्रशासन को पत्र लिखा। बैंक के पत्र पर कार्रवाई करते हुए सहायक कलेक्टर उपखंड प्रभारी प्रथम श्रेणी, छाता की कोर्ट से जमीन को कुर्क करने संबंधी आदेश जारी किया था। भूमि कुर्क किए जाने का आदेश भूमि की खतौनी में भी दर्ज किया गया। मगर, मुख्य मार्ग पर स्थित इस भूमि को बेचने का खेल छाता के सब रजिस्ट्रार कार्यालय की मिलीभगत से हो गया।
जून 2022 से बिक्री की गई शुरू
जसरथ ने जमीन को बेचने का खेल 2022 में जून माह से शुरू किया। इसके बाद इसने प्लाटिंग करते हुए कई हिस्सों में अलग-अलग लोगों को अपने हिस्से की कुर्क जमीन बेच दी।
जसरथ ने जमीन को बेचने का खेल 2022 में जून माह से शुरू किया। इसके बाद इसने प्लाटिंग करते हुए कई हिस्सों में अलग-अलग लोगों को अपने हिस्से की कुर्क जमीन बेच दी।
खतौनी और नियम, दोनों को किया नजर अंदाज
सब रजिस्ट्रार कार्यालय से जमीन का बैनामा होने के प्रकरण में न सिर्फ खतौनी में दर्ज कुर्क आदेश को नजरअंदाज किया गया। बल्कि इस एससी के नाम पर पट्टे की भूमि को बिना डीएम के आदेश के बिक्री न होने के नियम को भी दरकिनार कर कर दिया गया। एसडीएम श्वेता सिंह ने मामले में सब रजिस्ट्रार से रिपोर्ट तलब की है। वहीं, कई स्तर से इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसमें लाखों रुपये की रिश्वत बाजी का खेल भी सामने आ रहा है। अगर, सही ढंग से जांच हुई तो कई सरकारी कुर्सियों पर गाज गिरना तय है।
सब रजिस्ट्रार कार्यालय से जमीन का बैनामा होने के प्रकरण में न सिर्फ खतौनी में दर्ज कुर्क आदेश को नजरअंदाज किया गया। बल्कि इस एससी के नाम पर पट्टे की भूमि को बिना डीएम के आदेश के बिक्री न होने के नियम को भी दरकिनार कर कर दिया गया। एसडीएम श्वेता सिंह ने मामले में सब रजिस्ट्रार से रिपोर्ट तलब की है। वहीं, कई स्तर से इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसमें लाखों रुपये की रिश्वत बाजी का खेल भी सामने आ रहा है। अगर, सही ढंग से जांच हुई तो कई सरकारी कुर्सियों पर गाज गिरना तय है।
तहसीलों में खुलेआम हो रहा जमीनों का खेल
तहसीलों में खुलकर जमीनों का खेल हो रहा है। सरकारी कर्मचारी और अधिकारी इस खेल को अंजाम दे रहे हैं। वृंदावन और जैत इलाके में पुलिस भी इस खेल में खुलेआम उतर आई है। एक-एक जमीन के कई-कई बैनामे कर दिए गए हैं। इनमें आरोपियों पर मुकदमा तो दर्ज होता है। मगर, पुलिस वादी पक्ष को टहलाती रहती है। आरोपियों के नाम मुकदमों से निकालने में खुलेआम पैसे का खेल एक राजपत्रित कुर्सी से किया जा रहा है। छाता एसडीएम श्वेता सिंह ने बताया कि मामला गंभीर है। सब रजिस्ट्रार से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की है। उच्चाधिकारियों को भी मामले से अवगत करा दिया गया है। वहीं छाता सब रजिस्ट्रार अरुण प्रकाश ने बताया कि कुर्क भूमि का बैनामा कर दिया गया, यह मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जानकारी की जुटाई जा रही है।
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Author: Vijay Singhal
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