सजा के कड़े प्रावधानों के विरोध में हड़ताल पर गए ट्रक ऑपरेटर्स बुधवार को वापस आ गए। उनके आने से माल परिवहन फिर से सुचारू हो गया। हालांकि बुधवार सुबह तक स्थिति ऐसी रही कि एक-दो ही चालक ट्रकों को लेकर निकले, मगर दोपहर बाद चालक ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के यहां पहुंचे और ट्रकों को लेकर रवाना हुए। इस पर पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली। ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन जिला मथुरा के अध्यक्ष धर्मवीर चौधरी ने बताया कि जिले में तीन हजार से अधिक ट्रक जिले में पंजीकृत हैं। 3200 के करीब ऑपरेटर और 2500 के करीब क्लीनर हैं। मंगलवार रात को हड़ताल खत्म का एलान होने के बाद बुधवार की सुबह ट्रक चालक और क्लीनरों को बुलाया गया। हालांकि सर्दी के चलते कम ही लोग आए, मगर दोपहर में काफी चालक आ गए। इससे 800 से 1000 के करीब ट्रक माल लोड कर रवाना हुए। अन्य चालकों ने सर्दी का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार से नियमित संचालन का आश्वासन दिया है। धर्मवीर चौधरी ने बताया कि हड़ताल के कारण करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ था। ऑटो और टेंपो चालकों ने भी ट्रक ऑपरेटरों की हड़ताल में समर्थन का एलान किया था। मंगलवार को राया रूट पर ऑटो-टेंपो नहीं चले, मगर बुधवार को जिले के सभी मार्गों पर यह संचालित हुए। हालांकि नियमों को फिर भी ताक पर रखा गया। ऑटो में क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर हाईवे पर दौड़ाया गया। इससे सवारियों की जान को तो जोखिम में डाला ही गया। यातायात नियमों का भी उल्लंघन किया गया। मगर, पुलिस भी हड़ताल के एलान को देखते हुए इन्हें रोकने-टोकने से बचती हुई नजर आई। डग्गामार वाहन चालकों की चांदी कट रही है।
कोहरे के चलते ट्रेनों और रोडवेज बसों के संचालन पर असर जारी है। इसका फायदा डग्गामार वाहन खूब उठा रहे हैं। आगरा, हाथरस, पलवल रूट पर संचालित डग्गामार वाहन चालकों द्वारा सवारियों से रोडवेज बसों से भी अधिक किराया वसूला गया, जो डग्गामार वाहन 60 से 70 रुपये में आगरा तक का किराया वसूलते थे। उन्होंने भी 80 से 90 रुपये तक किराया वसूलना शुरू कर दिया है। रोडवेज बसें न मिलने और ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण मजबूरन यात्रियों को इनमें सफर करना पड़ा। इधर, मथुरा जंक्शन से होकर गुजरने वाली 20 से अधिक सुपरफास्ट ट्रेन रद्द रहीं। 15 से अधिक ट्रेन अपने निर्धारित समय से 10 से 15 घंटे की देरी से स्टेशन पर पहुंची।
