हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह विवाद में नया मोड़ आ गया। वाराणसी में ज्ञानवापी की तरह ही शाही ईदगाह के वैज्ञानिक सर्वे की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। इसमें वैज्ञानिक सर्वे की मांग की है। बता दें कि ज्ञानवापी में भारतीय पुरातत्व विभाग यानी ASI की टीम सर्वे कर रही है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व आशुतोष पांडे कर रहे हैं। वह सिद्धपीठ माता शाकुंभरी पीठाधीश्वर भगुवंशी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस तरह के निर्माण को मस्जिद नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, 1968 में हुए समझौते की वैधता के खिलाफ तर्क देते हुए इसे दिखावा और धोखाधड़ी बताया है। याचिकाकर्ता भगुवंशी आशुतोष पांडे ने आरोप लगाया कि शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंधन समिति जैसी संस्थाएं संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के स्तंभों और प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया गया है। जनरेटर का इस्तेमाल किया। इससे दीवारों और स्तंभों को ज्यादा नुकसान हुआ है।याचिकाकर्ता ने परिसर में होने वाली प्रार्थनाओं (नमाज) और अन्य गतिविधियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि भूमि को आधिकारिक तौर पर ‘ईदगाह’ नाम के तहत पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, इसका टैक्स ‘कटरा केशव देव, मथुरा’ के उपनाम के तहत एकत्र किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के वकील सार्थक चतुर्वेदी ने यह याचिका दाखिल की है। इसमें विवादित भूमि की पहचान, स्थान और माप की जांच की मांग की है। इसमें दोनों पक्षों द्वारा किए गए दावों को प्रमाणित करने के लिए एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण की आवश्यकता के लिए कहा गया है। कोर्ट से याचिकाकर्ता ने कहा है कि यह अनुरोध ज्ञानवापी में चल रहे एएसआई सर्वेक्षण से प्रेरित है। सर्वेक्षण से इस स्थल की ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व का पता लगाना है। इससे पहले शाही ईदगाह में कोर्ट ने अमीन सर्वे के आदेश दिए थे। हालांकि, बाद में इस पर कोर्ट की अपर बेंच ने रोक लगा दी थी। फिलहाल, जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। उधर, जिस श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने यह याचिका दाखिल की है। वह ट्रस्ट कुछ ही महीनों पहले गठित हुआ है।
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Author: Vijay Singhal
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