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मथुरा में है हाथियों का पहला अस्पताल, 13 साल में 50 से ज्यादा हाथियों का किया रेस्क्यू

ByVijay Singhal

Aug 12, 2023
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हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल

मथुरा के फरह में चुरमुरा गांव के पास हाथी संरक्षण केंद्र 2010 में खोला गया। यहां पहली मेहमान बनी चंपा नाम की हथिनी। चंपा को 2010 में हरियाणा के फरीदाबाद से लाया गया। एक ढाबे पर दयनीय हालत में होने के कारण चंपा की स्थिति खराब हो गई और उसका जीवन नहीं बच सका। इसी साल यहां गाजियाबाद से भोला हाथी को लाया गया। हाईवे पर हादसे का शिकार हुए भोला को महावत मरा समझ कर छोड़ गया। लेकिन वाइल्ड लाइफ एसओएस को जब जानकारी मिली तो टीम मौके पर पहुंची और उसे संरक्षण केंद्र लाई जहां वह आज मस्ती भरा जीवन जी रहा है। भोला हाथी की उम्र अब 60 वर्ष है। भोला की आंखों की रोशनी चली गई है। जिसके कारण उसकी सुरक्षा को देखते हुए उसके बाड़े के ले आउट में बदलाव किया गया है। बाड़े में कोई नुकीला चीज नहीं है। इसी तरह का हाल 60 वर्ष की बुजुर्ग नीना हथिनी का है। नीना हथिनी अर्थ राइट्स से पीड़ित है। संरक्षण केंद्र के जानकार बताते हैं यह लगातार उस पर किए गए नुकीली चीजों के प्रयोग के कारण हुआ है। हाथी संरक्षण केंद्र पर वर्तमान में 30 हाथी हैं। इनमें सबसे बुजुर्ग 70 वर्ष की सूजी नाम की हथिनी है। सबसे ज्यादा उम्र दराज होने के कारण सूजी की दोनों आंखों की रोशनी खत्म हो गई है और उसके दांत भी नहीं हैं। स्वास्थ्य समस्या आने के कारण सूजी का विशेष ख्याल रखा जाता है। सूजी को संरक्षण केंद्र से बाहर जब ले जाया जाता है तो ख्याल रखा जाता है कि उसके रास्ते में कंकड़,कांटे न आएं। सूजी को खाने में वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम फलों का पेस्ट बनाकर देती है,जिसे सूजी स्मूथी के रूप में जाना जाता है।वाइल्ड लाइफ एस.ओ.एस के सह-संस्थापक और सी.ई.ओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया नीना, भोला और सूज़ी की तरह, जब ऐसे और भी वृद्ध हाथियों को रेस्क्यू किया तब वह बेहद ही कमजोर, कुपोषित और घायल थे। देखरेख में काफी समय बिताने के बाद, आज वे अपने अतीत की यातनाओं से बाहर आ रहे हैं। विश्व हाथी दिवस पर इस बात को बढ़ावा देना चाहते हैं कि व्यवसायिक रूप से शोषित हाथियों के जीवन को कैसे बेहतर बनाया जा सके एवं उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाली पशु चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा सके। अनुमान है कि भारत में करीब 2,600 से अधिक बंदी हाथी हैं और इनको सहायता प्रदान करने के लिए बहुत ही अधिक संसाधनों की आवश्यकता है। एक ऐसा भविष्य देखना चाहते हैं, जहां सड़कों पर हाथियों से भीख मंगवाना बंद हो सके। वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा घायल, बीमार और वृद्ध हाथियों के इलाज के लिए, वाइल्ड लाइफ एस.ओ.एस ने नवंबर 2018 में मथुरा में भारत का पहला हाथी अस्पताल स्थापित किया। संयोग से, वृद्ध हाथियों में से एक, 60 वर्षीय हौली अस्पताल में इलाज पाने वाली पहली हथनी बनी। लेज़र थेरेपी और हाइड्रोथेरेपी जैसी सुविधाओं से लैस अस्पताल ने उसके इलाज को बेहतर बनाने में काफी मदद की है।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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