हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
भरतपुर। पक्षियों का स्वर्ग कहे होने वाले केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में देश विदेशों से हजारों की संख्या में प्रतिवर्ष पक्षी आते है। उन्हें निहारने के लिए प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में पक्षी प्रेमी घना आते हैं। यह प्लास्टिक की पानी व शीतल पेय पदार्थों की बोतलें समेत चिप्स व कुरकुरे आदि के पाउच ले जाते हैं और यहां-वहां फेंक देते हैं। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। केवलादेव में प्लास्टिक उत्पाद ले जाने पर रोक लगा दी गई है। पानी आदि की बोतल अंदर ले जाने पर 50 रुपये प्रति उत्पाद जमा कराने होंगे। वेटलैंड्स, ग्रासलेंड्स के साथ इतिहास की घटनाओं को समेटे केवलादेव पक्षियों के साथ स्पोटेड डियर, सांभर, अजगर, विभिन्न प्रजातियों के पेड़ पौधों का घर है। कई बार उद्यान पानी से कमी से जूझा। परंतु प्रशासनिक चेतना के साथ समय रहते यहां पानी उपलब्ध हो सका। इस सबके बीच सबसे बड़ी चुनौती थी, केवलादेव को प्लास्टिक से बचाना। पर्यटक अपने साथ खाद्य सामग्री एवं पानी की बोतल ले जाकर यहां-वहां फेंक देते हैं। हालांकि उद्यान प्रशासन द्वारा जगह-जगह डस्टबिन रखवा कर इस खतरे को रोकने के प्रयास किए जाते रहे। उद्यान के उप वन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि पर्यटकों द्वारा पार्क में लाए जाने वाले सामान की प्रवेश द्वार पर चेकिंग की जाती है। प्रत्येक प्लास्टिक निर्मित उत्पाद पर 50 रुपये प्रति उत्पाद फीस जमा कर टैग लगा दिया जाता है। पर्यटक लौटकर उत्पादों जमा कराकर फीस वापस ले जाते हैं। इस पहल का नतीजा पार्क में प्लास्टिक अब न के बराबर है। लंदन से आई महिला पर्यटक एमा ने कहा कि वह यहां के प्राकृतिक माहौल को देख कर अचंभित है। पार्क में रहने वाले वन्यजीव एवं पक्षियों के साथ मौजूद वेटलैंड्स उन्हें प्रकृति की ओर आकर्षित करते हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य में 1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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Author: Vijay Singhal
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