हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि ज्ञानवापी को अगर मस्जिद कहेंगे तो विवाद होगा। मुख्यमंत्री ने यह बयान वाराणसी में चल रहे ज्ञानवापी विवाद को लेकर दिया। CM ने कहा कि जिसको दृष्टि दी है वह जाकर देखे की त्रिशूल मस्जिद के अंदर क्या कर रहा है। हमने तो नहीं रखे हैं, ज्योतिर्लिंग है देव प्रतिमाएं हैं। वहां की दीवार चिल्ला चिल्ला कर कह रही हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान का मथुरा में हिंदूवादियों ने स्वागत किया और कहा कि अब मुस्लिम सगठनों को भाईचारा दिखाना चाहिए। त्रिशूल बाबा उर्फ धर्मेंद्र गिरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो ज्ञानवापी को लेकर बयान दिया है वह सनातनी की पहचान है। जब तक ज्ञानवापी और मथुरा पर फैसला नहीं आएगा तब तक 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं होगा। त्रिशूल बाबा ने एलान करते हुए कहा कि सरकार और न्यायालय ज्ञानबापी और मथुरा पर निर्णय लें नहीं तो 2024 का चुनाव नहीं होगा। भागवत प्रवक्ता और काशी विद्वत परिषद पश्चिमांचल के प्रभारी रहे कार्षिणी नागेंद्र महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान अत्यंत सराहनीय है। त्रिशूल,चक्र,गणेश जी की प्रतिमा,नंदी, मां पार्वती की प्रतिमा ज्ञानवापी में विराजमान हैं। औरंगजेब, बाबर जैसे आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़कर मस्जिद स्थापित की। नागेंद्र महाराज ने सुप्रीम कोर्ट और गृह मंत्री से अपील करते हुए कहा कि सनातनियों की भावना का ख्याल करते हुए वहां पर पूजा का अधिकार दिया जाए। श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने बताया कि ज्ञानवापी पर पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे किया उससे जो साक्ष्य मिले उसे अब मुख्यमंत्री ने भी मान लिया कि वहां मंदिर था। त्रिशूल है,मंदिर की कलाकृति है। मुस्लिम संगठनों को मान लेना चाहिए वह मंदिर था बाद में मस्जिद बनी है। मुगल शासकों ने अवैध अतिक्रमण किया था। हिंदुओं के मठ मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई। मुस्लिम संगठनों को भाईचारा कायम करना चाहिए। ज्ञानवापी मस्जिद पर मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुये देवकी नंदन महाराज ने कहा कि चाहे काशी की ज्ञानवापी मस्जिद हो, मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि की शाही मस्जिद हो या आगरा की जामा मस्जिद, जहां भी आप तलाश करेंगे वहां सनातन के चिन्ह मिल जायेगें । तथ्यों को झुठलाया नहीं जा सकता, इनके आधार पर ही मुख्यमंत्री ने सही बात कही है । उन्होंने कहा कि आगरा जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे भगवान केशवदेव विग्रह दबे हुये हैं । वहां भी जल्द से जल्द सर्वे कराकर सनातन समाज के साथ न्याय करना चाहिये ।
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Author: Vijay Singhal
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