हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा की पोक्सो कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार और हत्या के मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 1 लाख 30 हजार रुपए का अर्थ दंड भी लगाया है। कोर्ट ने यह फैसला अगस्त 2020 में थाना जमुनापार क्षेत्र में हुई नाबालिग से दुराचार और हत्या के मामले में 35 महीने बाद सुनाया। केस की सरकार की ओर से पैरवी कर रहीं स्पेशल डीजीसी पोक्सो कोर्ट श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट ने बताया कि पीड़िता के पिता ने थाना जमुनापार में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि उसकी 9 वर्षीय बेटी तथा बनवारी की 9 वर्षीय भांजी 31 अगस्त 2020 की रात करीब 8 बजे गांव की ही एक दुकान पर सामान लेने गयी थी। दोनों बच्चियां कुछ देर तक घर वापस नही लौटी तो पीड़िता का पिता तथा गांव के कई लोग दोनो बच्चियों को खोजने लगे। बालिका की तलाश में जुटे परिजनों को 31 अगस्त की रात 11 बजे बनवारी की भांजी की मां ने बताया कि बनवारी उसकी बेटी को लेकर घर पर आया है। जब बनवारी से यह पूछा गया कि बेटी कहां है तो बनवारी ने बताया कि उसे नही मालूम। यह कहते हुए बनवारी ने कहा कि वह पीड़िता के घर पर ही आ रहा है, किन्तु बनवारी घर पर नहीं आया। जिसके बाद पीड़िता के पिता को शक हुआ कि बनवारी ने उनकी बेटी का बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया है।
वादी की तहरीर के आधार पर थाना जमुनापार पर अभियुक्त बनवारी के विरूद्ध मुकदमा अपराध संख्या 287/2020, अन्तर्गत धारा 363, 366 भारतीय दण्ड संहिता पंजीकृत किया गया था। पुलिस विवेचना में 1 सितम्बर 2020 को ग्राम मावली के जंगलों में पीड़िता का शव बरामद हुआ था। जिसमें पुलिस के द्वारा पीड़िता के साथ बलात्कार के बाद गला घोंटकर हत्या करना पाया था। विवेचना में आरोपी बनवारी को आरोपी मानते हुए धारा 363, 376, 302, 201 भारतीय दंड सहिता व 5/6 पोक्सो एक्ट में मुकदमा परवर्तित हुआ था। विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट जज राम किशोर यादव द्वारा अभियुक्त बनवारी को दोषी सिद्ध कर दिया। स्पेशल डीजीसी अलका उपमन्यु ने बताया कि कोर्ट ने धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (यथा संशोधित 2019) के अन्तर्गत मृत्यु दण्ड के दण्ड से दण्डित किया गया है। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि अभियुक्त बनवारी को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाये जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाये। इसके अलावा अभियुक्त बनवारी को धारा 363 भारतीय दण्ड संहिता के अपराध में 5 वर्ष के कठोर कारावास एवं बीस के अर्थ दण्ड, धारा-302 के अन्तर्गत आजीवन कारावास उसके जीवन की अंतिम सांस तक तथा एक लाख के अर्थ दण्ड, धारा 201 में मृत्यु से दण्डनीय साक्ष्य का विलोपन करने के अपराध में 6 वर्ष के कठोर कारावास एवं दस हजार के अर्थ दण्ड की सजा सुनाई है। मृत्यु दण्ड को छोड़कर दी गयी सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी। जेल में बितायी गयी अवधि दण्डादेश में समायोजित की जायेगी। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सिद्ध दोष बनवारी द्वारा अर्थ दण्ड की धनराशि जमा करने पर 80 प्रतिशत धनराशि बतौर प्रतिकर के रूप में मृतका के विधिक प्रतिनिधि उसके माता-पिता को दी जायेगी। मृतका के विधिक प्रतिनिधियो को अन्तर्गत धारा 357 ए दण्ड प्रक्रिया संहिता सपठित धारा-33(8) पोक्सो एक्ट 2012 एवं नियम 9 पोक्सो नियम 2020 मुआवजा प्रदान करने की सिफारिश की गयी है। वहीं अभियुक्ता नीलम को दोष मुक्त कर दिया। वादी की तरफ से सरकार की ओर से स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट व निजी तौर पर अधिवक्ता विजय सिंह चौहान एडवोकेट व अभियुक्त की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता किशन सिंह बेधड़क एडवोकेट ने पैरवी की।
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Author: Vijay Singhal
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