हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती में वर्ष 2018 में हुए प्रदेश के सबसे बड़े घोटाले में काफी दिनों की चुप्पी के बाद पुलिस एक बार फिर हरकत में आ गई है। महावन थाना पुलिस ने इस घोटाले में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति कराने के आरोपी और जमानत पर चल रहे चिदानंद उर्फ चेतन सारस्वत निवासी गांव कारब को शुक्रवार देर शाम फिर गिरफ्तार किया।

घोटाले के प्रमुख आरोपियों में से एक चेतन सारस्वत पर थाना नौहझील, शेरगढ़, बरसाना व महावन में ही आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि पुलिस ने अभी पूरे मामले का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सूत्रों की माने तो वर्ष 2018 में गणित-विज्ञान शिक्षक भर्ती में फर्जी तरीके से भर्ती हुए 108 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उनमें से आठ शिक्षकों के पते व अन्य जानकारियों को बदल दिया गया था। ताकि पुलिस उन तक ना पहुंच सके। पुलिस काफी समय से उन शिक्षकों की तलाश में जुटी थी, लेकिन जानकारी गलत होने के कारण उन्हें ढूंढ नहीं पा रही थी। पुलिस को जानकारी मिली कि ये शिक्षक चेतन सारस्वत द्वारा फर्जी तरीके से भर्ती कराए गए थे और उनकी निजी जानकारियों को बदलवाने के पीछे भी उसी का हाथ था। सूत्रों का कहना है कि जिन शिक्षकों को पुलिस ढूंढ रही है उसमें से अधिकतर फर्जी शिक्षक चेतन सारस्वत के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश करने के लिए चेतन को गिरफ्तार किया है। चेतन को वर्ष 2018 में भी गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर था।भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि तत्कालीन बीएसए रहे संजीव कुमार सिंह समेत चारों निलंबित आरोपी खंड शिक्षा अधिकारियों की बहाली की जा चुकी है। सभी आरोपी निलंबित शिक्षक भी बहाल हो चुके हैं। मुख्य आरोपी लिपिक महेश शर्मा को निलंबन भत्ते के नाम पर पूर्ण वेतन दिया जा रहा है। पुलिस भी आरोपियों पर मेहरबानी दिखाती रही है। शासन के आदेश पर गैंगस्टर एक्ट में निरुद्ध आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने के नाम पर मात्र एक आरोपी रविंद्र कुमार के विरुद्ध ही कुर्की की र्कारवाई की गई।
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Author: Vijay Singhal
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