हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा में 80 साल के संत गंगा जी वाले बाबा फेमस हैं। गंगा जी वाले बाबा भगवान गिर्राज के भक्त हैं। वह अभी तक 132 दंडवती परिक्रमा कर चुके हैं। उनकी आस्था ऐसी है कि वह पूर्णिमा में भगवान के अभिषेक के लिए हर महीने गंगा-यमुना का जल लेकर आते हैं। यह जल वह उत्तराखंड से टैंकर में भरकर लाते हैं। जबकि हर साल गंगा-यमुना के साथ ही सरयू, मंदाकिनी, गुप्त गोदावरी, नर्मदा और भरत कूप आदि नदियों का जल लाते हैं। इन्हीं से मथुरा के सभी मंदिरों में भगवान का अभिषेक किया जाता है। हाड़ कंपाऊ सर्दी हो या कड़क धूप या फिर मूसलाधार बारिश…संत का अभिषेक के लिए जल लाने का काम कभी रुकता है। यह काम वह पिछले 50 साल से लगातार करते चले आ रहे हैं। गंगाजी वाले बाबा की मानें तो यह सब वह यूं ही नहीं कर रहे हैं। इसके पीछे खास वजह है। उनका कहना है कि करीब 50 साल पहले उनको सपने में भगवान गोवर्धन नाथ ने दर्शन दिए। भगवान ने उनसे अभिषेक के लिए गंगा-यमुना का जल गोवर्धन लाने के लिए कहा। इसके बाद बाबा प्रयागराज पहुंचे। उन्होंने वहां से गंगा और यमुना का जल लिया। फिर वह ब्रज के राजा दाऊजी के मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के पुजारी को जल दिया। इससे भगवान गिर्राज और बलदाऊ जी का अभिषेक किया गया। तब से यह सिलसिला लगातार जारी है। गंगा जी वाले बाबा मूल रूप से आगरा के रहने वाले हैं। वह आगरा के शमशाबाद इलाके में एक निजी स्कूल चलाते थे, जिसमें कोई फीस नहीं लगती थी। बाद में बाबा का मन भक्ति में लग गया। इसके बाद वह सब कुछ त्याग कर संत बन गए और मथुरा आ गए। संत अभी गोवर्धन के दानघाटी मंदिर में 12 फीट लंबे और 6 फीट चौड़े कमरे में रहते हैं। इसी कमरे में उनका रसोईघर और पूजा स्थल भी है। इतनी उम्र होने के बाद भी बाबा अपना सारा काम खुद ही करते हैं। संत के मुताबिक, वह गिर्राज जी की 21 किलोमीटर की दंडवती परिक्रमा 4 दिन में पूरी करते थे। अभी तक 132 दंडवती परिक्रमा कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 3 दंडवती परिक्रमा ब्रज की भी की है। संत ने ब्रज की 84 कोस की पहली परिक्रमा 84 दिन में, दूसरी 90 दिन में और तीसरी 108 दिन में की थी। संत से जब सवाल पूछा- क्या नीलकंठ के पास बने बैराज से गंगा जल लाने पर कोई रोकता है? इस सवाल के जवाब में संत ने कहा, प्रभु के काम में कभी रुकावट नहीं आती है। इसके बाद संत एक थैले में से कुछ कागज निकालते हैं। दिखाते हुए कहते हैं कि उनको सरकार और प्रशासन की तरफ से अनुमति मिली है। बाबा ने बताया, जिस टैंकर से मैं पवित्र जल लाता हूं, वह सभी तरह के टैक्स से फ्री है। उन्होंने बताया कि जब कभी टैंकर खराब हो जाता है तो सही करने वाले मिस्त्री भी पैसा नहीं लेता है। जो ड्राइवर साथ जाता है, वह सभी नियमों का पालन करता है। ड्राइवर जनेऊ पहनकर बिना चप्पल के ही टैंकर चलाता है। डीजल आदि खर्च के लिए कोई भक्त दे देता है तो ठीक, नहीं तो गांव में खेती कर अपना खर्च चल जाता है। गंगा जी वाले बाबा ने बताया कि वह ब्रज के मंदिरों के साथ ही राजस्थान के करौली के मदन मोहन जी मंदिर और कैला देवी मंदिर पर भी नदियों का जल पहुंचाते हैं। इसके लिए वह किसी तरह का शुल्क नहीं लेते हैं। संत का कहना है कि ब्रज की धूल में रहने
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Author: Vijay Singhal
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