मथुरा। मथुरा छावनी बोर्ड का अस्तित्व खत्म होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने देश के 16 छावनी बोर्ड को स्थानीय निकायों में शामिल करने का फैसला किया है। इसमें मथुरा सहित उत्तर प्रदेश के चार छावनी बोर्ड शामिल हैं। मथुरा छावनी बोर्ड करीब 190 साल पहले अस्तित्व में आया था। वर्ष 1940 में इसके आसपास के सिविल एरिया क्षेत्र को भी छावनी बोर्ड का हिस्सा बना दिया गया था। अब इसे नगर निगम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह काम रक्षा मंत्रालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को सौंपा गया है। समिति के चेयरमैन रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी और समिति के सचिव संबंधित छावनी परिषद के सीईओ को बनाया गया है। 20 जून को रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार उत्तर प्रदेश के छावनी बोर्ड मथुरा, बबीना (झांसी ) फतेहगढ़ और शाहजहांपुर को संबंधित निकायों में शामिल किया जाना है। इस प्रक्रिया में 7 सदस्यीय समिति छावनी की संपत्तियों के हस्तांतरण व एरिया के स्थानांतरण की सिफारिश करेगी। मथुरा छावनी का एरिया दो भागों में बटा है। एक तरफ रेजिमेंटल बाजार का हिस्सा है जो सदर क्षेत्र से सटा है जबकि दूसरा क्षेत्र मोती कुंज और मोतीकुंज एक्सटेंशन, रेलवे कॉलोनी, मयूर विहार, हनुमान नगर और चंदन वन है। इस क्षेत्र के लोग लंबे समय से नगर निगम में शामिल किया जाने की मांग कर रहे हैं। मथुरा में छावनी बोर्ड के अध्यक्ष स्थानीय सेना हेड क्वार्टर के ब्रिगेडियर हैं। पिछले कई साल से चुनाव नहीं हुआ है। कुछ माह पहले चुनाव को लेकर सरगर्मियां शुरू हुई थीं, मतदाता सूचियां बन गईं थीं, आपत्तियां और निस्तारण होने के बाद नए नाम जोड़ने की प्रकि्रया भी पूरी कर ली गई थी, लेकिन बाद में रक्षा मंत्रालय के आदेश ने स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया। चुनाव न होने के कारण छावनी परिषद के उपाध्यक्ष का पद 8 वर्ष से खाली है। निर्वाचन न होने के कारण फिलहाल संपूर्ण दायित्व सीईओ की देखरेख में हो रहे हैं।
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Author: Vijay Singhal
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