भारत में वैसे तो अनेकों जगह शनि देव के मंदिर हैं। लेकिन दो मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं। पहला महाराष्ट्र के शनि सिगनापुर में और दूसरा मथुरा के कोसी नंद गांव रोड पर स्थित कोकिला वन स्थित शनि देव का मंदिर। इस मंदिर पर हर शनिवार को लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और शनि देव की पूजा करते हैं। कोकिला वन स्थित शनि देव मंदिर को लेकर मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान कृष्ण ने शनि देव को दर्शन दिए थे। कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में जब शनि देव भगवान के दर्शन करने नंद भवन नंद गांव आ रहे थे तो भगवान कृष्ण ने उनको रोक दिया। भगवान के रोकने से शनि देव व्याकुल हो गए। शनि देव नंदगांव से 1 कोस दूर स्थित वन में विराजमान हो कर भगवान कृष्ण के दर्शन की चाहत में तपस्या करने लगे। शनि देव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने इसी वन में कोयल के रूप में उनको दर्शन दिए। तभी से इस स्थान का नाम कोकिला वन हुआ।शनि देव के जन्म उत्सव के अवसर पर कोकिला वन स्थित शनि देव मंदिर पर गुरुवार शुक्रवार की मध्य रात को 12 बजे पंचामृत अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रों के बीच शनि देव की प्रतिमा का दूध,दही,घी,शक्कर और शहद से अभिषेक किया गया। 151 किलो पंचामृत सामग्री से जब भगवान शनि देव का अभिषेक किया जा रहा था उस दौरान पूरा मंदिर परिसर शनि देव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। शनि जन्म उत्सव के अवसर पर कोकिला वन में खासा उत्साह है। यहां शनि जन्म उत्सव के अवसर पर विविध धार्मिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। मंदिर को फूलों से सजाया गया है। शनि देव को फूल बंगले में विराजमान किया गया है। रात को भक्तों द्वारा शनि देव का भव्य जागरण किया गया। शनि देव के दर्शनों के लिए दिल्ली,हरियाणा,राजस्थान,पंजाब आदि राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
