हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा।वृंदावन में यमुना किनारे केशीघाट के समीप स्थित है भगवान नृसिंह देव का 500 वर्ष पुराना प्राचीन मंदिर। इस मंदिर में स्थापित भगवान नृसिंह देव की चतुर्भुजी प्रतिमा 500 वर्ष पूर्व यमुना जी से प्रगट हुई। मंदिर के गोस्वामी राधा कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि करीब 450-500 वर्ष पूर्व उनके पूर्वजों को यह प्रतिमा यमुना जी से मिली थी। कान्हा की नगरी वृंदावन में भगवान नृसिंह देव का एक ऐसा मंदिर भी है जहां भगवान नृसिंह देव के चेहरे की पूजा होती है। यहां जिस चेहरे की पूजा होती है वह कितना पुराना है यह किसी को नहीं पता लेकिन मंदिर के पुजारी को यह जरूर पता है कि इसे 300 वर्षों से किसी ने नहीं धारण ( पहना) किया है। भगवान नृसिंह देव के इस मंदिर में जब हम पहुंचे तो यहां मंदिर में स्थापित चेहरे के बारे में पुजारी प्रवीन पचौरी से जानकारी की तो उन्होंने बताया कि उनके पूर्वजों ने बताया था कि करीब 300 वर्ष पहले नृसिंह चतुर्दशी पर आयोजित लीला के दौरान इस चेहरे को जब एक व्यक्ति को धारण कराया गया तो उस के शरीर में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिला। चेहरा धारण करने वाले व्यक्ति के हाथों के नाखून बढ़ने लगे और चेहरा उग्र होने लगा। किसी तरह चेहरा पूजा अर्चना कर उतारा गया तो व्यक्ति का शरीर सामान्य हो गया तभी से यहां केवल पूजा की जाती है।भगवान नृसिंह के इस मंदिर में मूल रूप से भगवान वाराह देव विराजमान हैं। यहां विराजमान भगवान वाराह देव की काले पत्थर की शिला की प्रतिमा है। वराह भगवान के साथ ही भगवान नृसिंह प्रतिमा स्वरूप में विराजमान हैं। नृसिंह चतुर्दशी के दिन यहां भगवान नृसिंह के चेहरे का विधि विधान से पूजन अर्चन किया जाता है। भगवान नृसिंह के इस मंदिर में मूल रूप से भगवान वाराह देव विराजमान हैं। यहां विराजमान भगवान वाराह देव की काले पत्थर की शिला की प्रतिमा है। वराह भगवान के साथ ही भगवान नृसिंह प्रतिमा स्वरूप में विराजमान हैं। नृसिंह चतुर्दशी के दिन यहां भगवान नृसिंह के चेहरे का विधि विधान से पूजन अर्चन किया जाता है। भगवान नारायण के दस अवतार में से पांचवें अवतार भगवान नृसिंह का माना जाता है। भगवान नृसिंह श्री हरि विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतार कहे जाते हैं। भक्त की रक्षा के लिए भगवान नारायण ने नृसिंह अवतार लिया। इस अवतार में नारायण का सर सिंह का और शरीर नर का था। यही वजह है कि विष्णु जी के इस अवतार को नृसिंह अवतार कहा जाता है। भगवान नृसिंह जी के प्राकट्य उत्सव पर दैनिक भास्कर आपको भगवान नृसिंह के उस मंदिर के दर्शन कराने जा रहे हैं जो कि 500 वर्ष पुराना है।इसके अलावा भगवान नृसिंह के उस चेहरे के भी दर्शन कराते हैं जिसे नहीं कर पाता कोई धारण। भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया था। वैशाख माह की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह देव खंबा फाड़कर प्रगट हुए और हिरण्यकश्यप का वध किया। भगवान का नारायण का यह सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतार माना जाता है। वृंदावन भगवान राधा कृष्ण की भूमि है। यहां राधा रानी और भगवान कृष्ण के अनेकों मंदिर हैं। लेकिन भगवान कृष्ण की इस लीला भूमि पर भगवान नृसिंह देव के कई मंदिर हैं। इन्हीं मंदिरों में से केशीघाट स्थित प्राचीन लक्ष्मी नृसिंह एक मंदिर है।
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