हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। सुरीर में भले ही देश इक्कीसवीं सदी की ओर छलांग लगा रहा है लेकिन रुढ़िवादी विचारधारा से समाज का एक वर्ग अभी भी उबर नहीं पा रहा है। यही वजह है कि सुरीर के एक मोहल्ला में सती के श्राप की बंदिश के चलते महिलाएं सुहाग और संतान सलामती के करवाचौथ और अहोई अष्टमी का त्योहार नहीं मनाती हैं। उन्हें त्योहार मनाने पर सती मैया के नाराज होने का डर रहता है। बुजुर्गों का कहना है कि बात सैकड़ों वर्ष पुरानी है जब नौहझील के गांव रामनगला का ब्राह्मण युवक यमुना पार ससुराल से अपनी नवविवाहित पत्नी को विदा करा भैंसा बग्गी से घर लौट रहा था। रास्ता में सुरीर के मोहल्ला वघा में ठाकुर जाति के कुछ लोगों ने उनकी बग्गी में जुते भैंसे को लेकर विवाद हो गया था। जिसमें सुरीर के इन लोगों के हाथों गांव रामनगला के ब्राह्मण युवक की मृत्यु हो गई थी। उस समय बुजर्गों ने इसे पति के साथ सती हुई पत्नी का कोप माना और उस मुहल्ले में सती का मंदिर बनवा कर क्षमा याचना की । कहा जाता है कि अस्वाभाविक मृत्यु का सिलसिला तो थम गया लेकिन वह सुहाग और संतान सलामती के करवाचौथ और अहोई अष्टमी के त्योहार पर बंदिश लगा गई। तभी से इस मुहल्ले के ठाकुरों के परिवार में कोई महिला न तो पति के दीर्घायु को करवाचौथ का व्रत रखती है और न ही संतान की सलामती के लिए अहोई अष्टमी का त्योहार मनाती है। सैकड़ों वर्ष से चली आ रही इस परंपरा का पीढ़ी दर पीढ़ी निर्वहन होता चला आ रहा है। इस परंपरा को तोड़ने में महिलाओं को सती मैया के नाराज होने का डर रहता है।
7455095736
सती के श्राप से गांव में नहीं महिलाएं नहीं मनातीं करवाचौथ; अहोई अष्टमी का व्रत
