हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। मांट के बाल्हारा में रात्रि विश्राम के बाद राधारानी ब्रज यात्रा के यात्री यमुना किनारे पहुंचे। यहां यमुना की दुर्दशा और जल से उठती तीव्र दुर्गंध देखकर यात्री व्यथित हो गए। यमुना में स्नान और आचमन की इच्छा होने के बावजूद दुर्गंध और यात्रा समिति के निर्देशों के चलते यात्री ऐसा नहीं कर सके। मान मंदिर के पदाधिकारियों और यात्रा प्रबंधन समिति के सदस्यों ने यमुना की स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यमुना से जुड़े राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद वर्ष 2015 के आंदोलन के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं हुए। भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के बावजूद यमुना की उपेक्षा समझ से परे है। यात्रियों ने केंद्र और प्रदेश सरकारों से यमुना को अविरल और निर्मल बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यमुना की दुर्दशा दूर करने के लिए अब ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इसके बाद यात्रा के सभी सदस्य यमुना पार कर वंशीवट पहुंचे। यहां वंशी की धुन पर भजन-कीर्तन और नृत्य किया। इसके बाद राधा-कृष्ण के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध भांडीर वन पहुंचकर दर्शन किए। अंत में यात्रा पड़ाव स्थल पर पहुंची, जहां सभी यात्रियों ने विश्राम किया। यात्रा में राधाकांत शास्त्री, ब्रजशरण जी, ब्रजदास जी, नीलमणि दास, कृष्णदास, नृसिंहदास, राजकुमार शास्त्री, महेश शास्त्री, संजय प्रधान, शंकर बाबा और डॉ. रामजी लाल शास्त्री सहित अन्य श्रद्धालु शामिल रहे।
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यमुना की दुर्दशा देख भावुक हो गए राधारानी ब्रज यात्रा के श्रद्धालु
