हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुयो को तो इतना भी नहीं पता होता कि जिस पेड़े को खाने से कोई भी व्यक्ति बीमार पड़ सकता है, उस पेड़े का प्रसाद अपने आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी को अर्पित कर रहा है। ये सिलसिला दशकों से चला आ रहा है और खाद्य सुरक्षा विभाग गहरी नींद में सोया है। एक वर्ष पहले गठित हुई मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने जब इस मुद्दे को अपनी बैठकों में उठाना शुरू किया तो खाद्य सुरक्षा विभाग ने सेंपलिंग की शुरूआत करके अपनी जिम्मेदारी निभाकर दिखा दी। बावजूद इसके आज भी बांकेबिहारी मंदिर से लेकर विद्यापीठ चौराहा, इस्काॅन मंदिर, प्रेममंदिर के सामने से लेकर रुक्मिणी विहार मल्टीलेवल पार्किंग तक लगभग दो सौ दुकानों पर सिंथेटिक मावा से तैयार पेड़ा खुलेआम बिक रहा है और यही पेड़ा मंदिरों में ठाकुरजी को प्रसाद के रूप में देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु अर्पित कर रहे हैं, भोग लगाकर इस पेड़े को श्रद्धालु घर तक ले जाते हैं। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं, कोसों दूर सफर तय करके आराध्य बांकेबिहारीजी के जब भक्त दर्शन करते हैं तो उनके मन में भाव रहता है कि घर जाने के लिए ठाकुरजी का प्रसाद होना चाहिए। लेकिन, मंदिर प्रबंधन की ओर से भक्तों को घर तक ले जाने को प्रसाद की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बाहर से आ रहे भक्त मंदिर के आसपास दुकानों से पेड़ा खरीदकर ठाकुरजी को प्रसाद अर्पित करते हैं और सेवायत द्वारा लौटाने पर ठाकुरजी के इस भोग को बड़े भाव के साथ पहले खुद ग्रहण करते हैं और फिर घर तक इसे लेकर जाते हैं और स्वजनों को बांटते हैं। मंदिर के आसपास अधिकतर दुकानों में सिंथेटिक मावा से बने पेड़ा की बिक्री खुलेआम हो रही है। ये बात किसी से छिपी भी नहीं है और न ही खाद्य सुरक्षा विभाग से छिपी है। विभाग आए दिन कई टन पेड़े का मावा छापामार कार्रवाई में पकड़ता है। लेकिन, मंदिरों के आसापास सिंथेटिक मावा के पेड़े की बिक्री पर पाबंदी अब भी नहीं लगी है। ये पेड़ा न केवल ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर बल्कि बांकेबिहारी मंदिर से लेकर इस्काॅन और प्रेममंदिर के सामने मार्केट की अधिकतर दुकानों पर धड़ल्ले से बिक रहा है।
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बांकेबिहारी को भी चढ़ रहा मिलावटी प्रसाद, रोज चढ़ रहा 200 टन पेड़ा, कहां से आ रहा इतना मावा
