हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना में रात की नीरवता जैसे ही भोर की पहली आभा में बदलने लगी, बरसाना की धरती पर वह मंगल घड़ी उतर आई, जिसका इंतजार ब्रजवासी और देश-दुनिया से आए श्रद्धालु कर रहे थे। जन्मबेला आते ही भानु भवन में बधाई के स्वर गूंज पड़े। सखियों के मुख से निकले मंगल पदों और ढप की थाप ने वातावरण को आनंद से भर दिया। ऐसा लगा मानो बरसाना का कण-कण अपनी लाडो के आगमन की खुशी में झूम उठा हो। भानु भवन के भीतर जन्म की बधाई गूंज रही थी और बाहर मंदिर की ओर टकटकी लगाए खड़े श्रद्धालुओं के मन में बस एक ही लालसा थी अपनी आराध्य राधारानी के प्राकट्य दर्शन की। किसी के हाथ प्रार्थना में जुड़े थे, किसी की आंखें भावुक थीं और किसी की जुबान पर लगातार राधे-राधे था। जन्म की इस पावन बेला में बरसाना की गलियां और परिक्रमा मार्ग तक ऐसा लग रहा था, जैसे पूरा ब्रज अपनी लाडो के जन्मदिन की खुशी में शामिल हो गया हो। राधारानी के प्राकट्य के साथ भानु भवन में जन्म की बधाई का उल्लास छा गया। नंदगांव से आए समाजियों के स्वर उठे तो सखी भाव और गहरा हो गया। ढप की थाप के बीच बधाई पदों ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। सखियां आनंद में झूमती रहीं और श्रद्धालु इस मंगल दृश्य को निहारते रहे। कभी बधाई के स्वर ऊंचे होते तो कभी जय राधे का उद्घोष पूरे परिसर को गुंजा देता। भानु भवन में जन्म की बधाई शुरू हुई तो उसका उल्लास बरसाना की गलियों तक महसूस हुआ। कहीं श्रद्धालु हाथ जोड़े जन्मबेला को निहारते रहे तो कहीं समूह में खड़े भक्त राधे-राधे का जाप करते दिखाई दिए। देश-दुनिया से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए राधारानी का जन्मदिन किसी उत्सव से कम नहीं था। महिलाएं भक्ति में मग्न थीं, बच्चे अपने परिवार का हाथ थामे दर्शन की राह देख रहे थे और बुजुर्ग आंखें बंद कर राधे नाम का स्मरण कर रहे थे। जन्म की बधाई और जय राधे के उद्घोष के बीच पूरा बरसाना जैसे अपनी लाडो के जन्म की खुशी में एक साथ डूब गया।
7455095736
जन्मी बरसाने की लाडो, बजने लगी बधाई,भोर होते ही राधारानी के जयकारों से गूंजा ब्रज
