हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में पर्यटन को नई उड़ान देने के लिए यमुना में शुरू किया गया क्रूज संचालन बंद हो गया। कुछ दिन चलने के बाद क्रूज खड़ा हो गया। यमुना में खड़े-खड़े क्रूज कंडम हो गया है। वृंदावन के केशीघाट पर खड़े-खड़े क्रूज बंदरों का आशियाना बन गया है। अब इसे यमुना से हटाया जाएगा। कुछ जेटी प्लेटफार्म पहले ही नगर निगम ने हटा दिए हैं। भविष्य में यमुना में पानी की संभावनाओं को देखते हुए क्रूज संचालन का निर्णय लिया जाएगा। वृंदावन के जुगल किशोर घाट से गोकुल की वासुदेव वाटिका तक यमुना नदी के 22 किलोमीटर लंबे जलमार्ग पर क्रूज चलाया जाना था। यह परियोजना 2.25 करोड़ रुपये की थी। इसके पीछे उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना था। केशीघाट, विश्राम घाट और गोकुल बैराज समेत कुल 11 तैरते हुए टर्मिनल (फ्लोटिंग जेटी) बनाए जाने थे। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी एलकेमी समूह की कंपनी मथुरा क्रूज लाइन को दी गई। इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार का था और क्रूज का व्यावसायिक संचालन कंपनी को करना था। 25 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री ने यमुना में क्रूज संचालन का लोकार्पण भी कर दिया। इस क्रूज का नियमित या व्यावसायिक संचालन हो ही नहीं पाया। क्रूज को सुरक्षित तैरने के लिए कम से कम दो मीटर गहरे पानी की जरूरत थी। लेकिन यमुना में अत्यधिक गाद और पानी का स्तर कम होने के कारण क्रूज ट्रायल के दौरान ही बार-बार जमीन से टकराकर फंस गया। यहां तक कि क्रूज का नाम बदलकर ब्रज रथ तक कर दिया गया, लेकिन क्रूज नहीं चल सका। रही-सही कसर बीते वर्ष यमुना की बाढ़ ने पूरी कर दी। उधर, नाविकों ने भी क्रूज संचालन का विरोध किया और कई दिन तक धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने क्रूज में तोड़फोड़ भी कर दी। ऐसे में काफी दिन खड़े रहने के बाद बीते वर्ष दिसंबर में संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया। केशीघाट पर खड़े-खड़े क्रूज के कांच, दरवाजे और अंदर की महंगी सजावट पूरी तरह नष्ट हो गई और क्रूज बंदरों का बसेरा बन गया। अब ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर क्रूज और इसके प्लेटफार्म को हटाने के लिए कहा है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार ने बताया कि पत्र मिला है, क्रूज हटाने के लिए नगर निगम से वार्ता की जा रही है।
