हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के दो प्राचीन मंदिर अब दिवाली पर ही नहीं वर्षभर विद्युत प्रकाश से रोशन होंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा लाखों की लागत से फसाड लाइट लगाई जा रही हैं। इनकी सुरक्षा के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा वृंदावन के चार प्राचीन मंदिरों को संरक्षित किया जा रहा है। इनमें प्राचीन मदनमोहन मंदिर, गोविंद देव मंदिर, प्राचीन राधावल्लभ मंदिर एवं जुगलकिशोर मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों में से दो मंदिर गोविंददेव एवं मदनमोहन मंदिर पर फसाड लाइट लगाई जा रही है। एक मंदिर के द्वार से लेकर शिखर तक फसाड लाइट लगाने पर लगभग 60 लाख रुपये की लागत आएगी। एएसआई के निर्देश पर दिल्ली की कार्यदायी संस्था द्वारा गोविंद देव मंदिर में फसाड लाइट लगाने का कार्य चल रहा है। इसके बाद प्राचीन मदनमोहन मंदिर में फसाड लाइट लगाई जाएगी। एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. राजकुमार पटेल ने बताया कि प्राचीन धरोहरों पर लाइट नहीं लगाई जाती हैं क्योंकि लाइट की तपिश से धरोहर के सरफेस को नुकसान और उसके कमजोर होने का संभावना बनी रहती है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इन मंदिरों में फसाड लाइट लगाई जा रही है। साथ ही सरफेस पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े इसका ख्याल रखते हुए हल्की लाइटें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा इमारत को संरक्षित रखने के साथ ही बंदरों से भी लाइट को सुरक्षित रखना भी एक चुनौती था। इसलिए सावधानी पूर्वक फसाड लाइट लगाने का कार्य चल रहा है। दोनों मंदिरों में एक माह में यह कार्य पूरा हो जाने की संभावना है। गोविंद देव मंदिर में कार्य पूर्णता की ओर है जबकि मदनमोहन मंदिर में फसाड लाइट लगाने के कार्य में एक माह का समय लगेगा।
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Author: Vijay Singhal
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