हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा में आनंद और उल्लास में डूबे भक्त, भूख प्यास को भूलकर आराध्य के जन्म की प्रतीक्षा में सोमवार मध्यरात्रि घड़ी की टिक-टिक करती सुइयों को व्याकुलता से निहार रहे थे। रात्रि 12 बजे घड़ी की दोनों सुइयों का संगम होते ही भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर ब्रज में कान्हा के जन्म का उद्घोष हो गया। नटवर नागर के जन्मोत्सव के लाखों श्रद्धालु साक्षी बने। अजन्मे के जन्म पर मंत्रोच्चारण के बीच शंखनाद हुआ, तो मानो ब्रज की लता-पता भी झूम उठीं। देवकीनंदन के जन्मोत्सव पर मानो ब्रज का कण-कण धन्य हो गया। गोकुल सहित पूरे ब्रज के मंदिरों में प्रगट भये गोपाला… और बधाई गीतों से माहौल भक्तिमय हो गया। श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर माहौल कुछ इस प्रकार था कि घड़ी की सुई ने 11 बजने का इशारा किया तो श्री गणेश, नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू हुआ। 11.55 बजे तक कमल पुष्प एवं तुलसीदल से व सहस्त्रार्चन हुआ। अब 12 बजने में में बस पांच मिनट बाकी थे। हर श्रद्धालु लल्ला के आगमन को लेकर आतुर था। 11.59 बजते ही प्राकट्य दर्शन के लिए युगल सरकार के पट बंद हो गए। इस एक मिनट के पल में श्रद्धालुओं को लगा मानो घंटों बीत रहे हों। ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास महाराज, श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने-चांदी से निर्मित 100 किग्रा की कामधेनु गाय की प्रतिमा में गंगाजल सहित पंचामृत भरकर लल्ला का अभिषेक किया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की इस अद्भुत घड़ी पर भक्तों में उल्लास छा गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़े और घंटे-घड़ियाल गूंज उठे। झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि के बीच कान्हा के बधाई गीत गुंजायमान हो उठे। दर्शन का दौर 1:30 बजे तक चलता रहा।
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Author: Vijay Singhal
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