हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। यमुना में इस बार बाढ़ के मंजर ने बुजुर्गों के जेहन में 1978 की बाढ़ की यादों को ताजा कर दिया है। 45 साल पहले आई अब तक की सबसे अधिक भीषण बाढ़ के दौरान छत्ता बाजार से चौक बाजार तक नाव चली थी। इससे क्षेत्र के सभी बाजार बंद हो गए थे। दुकान और मकान आधे यमुना जल में डूब गए थे। यमुना का जल स्तर उस वक्त 169. 73 मीटर तक पहुंच गया था। यमुना का जल स्तर 167.30 मीटर पर पहुंचकर थम गया है। यमुना के इस उफान ने आसपास के इलाकों में तबाही मचा दी है। लोग इस मंजर को देखकर 1978 में आई बाढ़ की याद ताजा कर रहे हैं। उस बाढ़ के प्रत्यक्षदर्शी 72 वर्षीय सोहन लाल कातिब बताते हैं कि उन दिनों उनका घर स्वामीघाट पर ही था। 1978 में 7, 8 व 9 सितंबर को पानी का बहाव इस कदर तेज था कि घर की सीढि़या डूब गईं थीं। आधा घर पानी में था। छत्ता बाजार में नाव चली थीं। डोरी बाजार, स्वामी घाट, नया बाजार, असकुंडा बाजार, राजाधिराज बाजार, विश्राम घाट बाजार बंद हो गए थे। हर तरफ पानी ही पानी था। चौक बाजार सब्जी मंडी तक पानी भरा हुआ था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता यामिनी रमण आचार्य बताते हैं कि बाढ़ के मंजर को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मथुरा आई थीं। प्रधानमंत्री के साथ उन्होंने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। खुली जीप में इंदिरा गांधी ने यहां के हालातों का जायजा लिया था। 1978 की बाढ़ के अन्य प्रत्यक्षदर्शी कहते हैं कि सदर क्षेत्र में तो पानी इस कदर फैल चुका था कि एक मंजिल वाले मकान डूब गए थे। गोसना का टीला तक यमुना का जल नजर आता था। वृंदावन का लगभग संपूर्ण क्षेत्र पानी की चपेट में आ गया था। लोग टीले नुमा स्थलों पर रहते देखे गए। मथुरा में होलीगेट के अंदर नावें चलीं और जिला अस्पताल तक 3-3 फीट तक पानी भर गया था।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
