हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण और न्यास गठन के मामले में वृंदावन के कई रासाचार्यों ने मंदिर के सेवायतों के पक्ष में अपना समर्थन व्यक्त किया। रासाचार्यों ने चिंता व्यक्त की कि सरकार कॉरिडोर के बहाने मंदिर का अधिग्रहण करना चाहती है। उन्होंने आशंका जताई कि अधिग्रहण के बाद ब्रजवासी अपने आराध्य को पहले की तरह लाड नहीं लड़ा पाएंगे, जो ब्रज की भक्ति परंपरा का एक अभिन्न अंग है। रासाचार्यों का कहना है कि ब्रज में भगवान की सेवा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें लाड-दुलार और आत्मीयता का विशेष महत्व है। स्वामी हरिवल्लभ शर्मा छोटे ठाकुर ने कहा कि यह केवल कॉरिडोर का मामला नहीं है, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान पर हमला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रजवासियों का अपने आराध्य के प्रति यह अद्वितीय प्रेम और सेवा भाव ही उनकी पहचान है। इसे किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। रासाचार्यों ने सरकार से इस प्रस्तावित योजना पर पुनर्विचार करने और ब्रज की परंपराओं का सम्मान करने का आग्रह किया। विरोध कर रहे जय किशन भारद्वाज ने बताया कि तोड़फोड़ करना किसी प्रकार का हल नहीं है। यहां की प्राचीन संस्कृति सभ्यता सबसे अलग है। अन्य स्थानों पर जहां कॉरिडोर बना है आज भी वहां लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं और लोगों की मृत्यु भी होती है। इसलिए कॉरिडोर कोई समाधान नहीं है। यह तो केवल एक योजना के तहत ब्रजवासियों को यहां से हटाने की योजना बनाई गई है। विरोध कर रहे रासाचार्य पर्रिकर में स्वामी रवि कृष्ण शर्मा, अशोक व्यास, मुरारी स्वामी, जय प्रियाशरण, देवकी स्वामी, अवधेश स्वामी, स्वामी वेदप्रकाश, स्वामी गिर्राज, स्वामी घनश्याम, स्वामी सीताराम आदि उपस्थित रहे।
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Author: Vijay Singhal
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