हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। यमुना की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यह आईसीयू जैसी हालत में पहुंच गई है। यदि समय रहते इसे अविरल और निर्मल बनाने के प्रयास नहीं किए गए तो इसका प्रभाव पूरे समाज के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ेगा। ये विचार जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने विश्राम घाट पर सोमवार को जल सहेलियों द्वारा आयोजित यमुना चौपाल कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी भी नदी का अस्तित्व उसकी अविरल धारा से होता है। यमुना आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि समाज को आरोग्य प्रदान करने वाली जीवनदायिनी धारा है। नदियां बीमार होंगी तो समाज भी पूरी तरह निरोग नहीं रह सकता। उन्होंने जल सहेलियों की पदयात्रा की सराहना की। कहा कि यमुना को बचाने के लिए जल सहेलियां दिल्ली की ओर कूच कर रही हैं। सरकार को उनकी बातों को गंभीरता से सुनना चाहिए। कहा कि यमुना किनारे नए घाटों के निर्माण या मोटर बोट और स्टीमर संचालन के बजाय सरकारों को नदी को अविरल और निर्मल बनाने पर प्राथमिकता देनी चाहिए। कहा कि नदी के प्रवाह के वैज्ञानिक अध्ययन के बिना बनाए जा रहे कई नए घाटों पर बरसात के दौरान सिल्ट जमा हो जाती है जबकि पुराने घाटों पर ऐसी समस्या कम देखने को मिलती थी। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत यमुना पूजन से हुई। इसमें नदी संरक्षण का संकल्प लिया गया। जल सहेली समिति की अध्यक्ष पुष्पा कुशवाह ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान रंजीत पाठक, संजय अल्पाइन, अरविंद चतुर्वेदी, सचिन चतुर्वेदी, अश्वनी मिश्रा, धीरज सिंघल, सुधीर पचौरी आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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