हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा । सांझ, सज्जा, सजावत तथा राधारानी प्रेम का प्रतीत सांझी को भारत सरकार द्वारा भौगोलिक संकेत(GI Tag) प्रदान किया गया। पुष्टीमार्गीय व बल्लभ कुल से सम्बन्धित कला जो राधा कृष्ण के प्रेम तथा लीलाओं का प्रतीक हैं। अधिक प्रयासों से तथा कला के प्रति अपने प्रेम से मोहन वर्मा एवं उनके परिवार की लगन आज सांझी को अपने एक नये रूप की तरफ परिवर्तित कर चुकी हैं। जिस तरह से ब्रज की होली प्रसिद्ध है, उसी तरह सांझी भी ब्रज की एक प्राचीनतम कलाओं में अपना एक स्थान प्राप्त कर चुकी हैं।
क्या होता है GI Tag
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर GI Tag क्या होता है, तो आपको बता दें कि यह भौगोलिक संकेत है, जिसका प्रयोग उन उत्पादों के लिए किया जाता है, जिनकी एक विशेष भौगोलिक उत्पत्ति होती है। साथ ही उनके गुणों की प्रतिष्ठा भी होती है, जो कि उसके मूल कारण की वजह से है। वर्तमान में भारत में 400 से अधिक GI Tag वाली वस्तुएं मौजूद हैं।
कौन देता है GI Tag
भारत में साल 1999 में जीआई टैग को लेकर कानून बनाया गया था, जिसके बाद साल 2003 में इसे लेकर प्रक्रिया शुरू हुई और साल 2004 में पहला जीआई टैग दिया गया। भारत में यह टैग चेन्नई स्थित इंडियन ज्योग्राफिकल रजिस्ट्री द्वार दिया जाता है। जिस वस्तु को जीआई टैग मिलता है, उसे प्रत्येक 10 वर्ष में इसका नवीनीकरण कराना होता है।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
