हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
सरकारी मंच, पेंशन, आर्थिक मदद और अनुदान मिलने से भविष्य में बचेगी रासलीला
मथुरा। वृंदावन में ब्रज की रासलीला परंपरा के संरक्षण के लिए उपाय सुझाने के उद्देश्य से गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, सभागार में ‘रासलीला के संरक्षण’ विषयक संगोष्ठी/ परिचर्चा का आयोजन किया गया।
वृंदावन के साहित्यकार स्व. छैल बिहारी उपाध्याय ‘छैल’ की स्मृति में आयोजित संगोष्ठी में वृन्दावन के रासमंडलों से जुड़े अनेक रासाचार्यों ने उन व्यावहारिक कठिनाइयों से अवगत कराया जिनके कारण वृंदावन की रासलीला परंपरा का ह्रास हो रहा है। सभी ने रास को बचाने के उपाय सुझाते हुए राज्य सरकार से संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
स्व छैल बिहारी उपाध्याय ‘छैल’ की स्मृति में उनके सुपुत्र साहित्यकार कपिल देव उपाध्याय ने वृंदावन के रासाचार्यों को लोई उड़ाकर उनको सम्मानित भी किया।
संगोष्ठी के प्रारंभ में साहित्यकार श्री उपाध्याय ने कहा कि जहां रस है, वहां ही भगवान श्रीकृष्ण हैं। ब्रज में चार संप्रदायों की अलग-अलग परंपरा रही है। उसी परंपरा में संप्रदायों का साहित्य लेखन हुआ। उसमें काफी साहित्य का अभी प्रशासन नहीं हुआ है। रासलीला का आज भी प्रचुर मात्रा में साहित्य है जिसके प्रकाशन की आवश्यकता है।
संगोष्ठी के मध्य में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के निदेशक श्री दिनेश खन्ना ने अवगत कराया कि सरकारी स्तर पर रासलीला संरक्षण के प्रयास शुरू हो गए हैं। इस संस्थान में प्रशिक्षण के लिए ग्रंथागार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। संस्कृति विभाग के पूरे प्रयास हैं कि ब्रज में रासलीला को बचाया जाए। रासाचार्यों को पूरा सम्मान मिले। सरकारी स्तर पर रासमंडल दूसरे प्रांतों में रास करने पहुंचे।
संगोष्ठी में भागवतचार्य श्री श्रीवस्त जी ने कहा कि रासलीला ब्रज की मूर्ति व अमूर्ति धरोहर है। सत्य तो यही है कि आज ब्रज संस्कृति का संरक्षण रासलीला से ही संभव है। दुर्भाग्य से इस संरक्षक को आज संरक्षण की जरूरत पड़ रही है। रासलीला से ही कत्थक, कलाकार श्रृंगार विधि, मंच श्रृंगार, लोकगीत, ललित कलाओं व साहित्य आदि का सृजन हुआ है। दुर्भाग्य से आज वृंदावन के रासमंडल अब अतिथि गृह में बदल रहे हैं। सरकार को चाहिए कि रास को बचाने की चुनौती से निपटने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए। कलाकारों को पेंशन मिले।
भागवताचार्य प. अच्युत लाल भट्ट ने कहा कि फिल्म थिएटर आज रासलीलाओं पर हावी है। महंगे प्रस्तुतीकरण, ब्रजभाषा के खत्म प्रायः होने और मंच पर खड़ी भाषा के प्रचलन आदि से रासलीला को बचाना मुश्किल हो रहा है। रास के समक्ष जो व्यावहारिक समस्याएं हैं उन्हें सरकार हल करे।
उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा उमेश चंद शर्मा ने संचालन करते हुए आह्वान किया कि गीता शोध संस्थान में रासलीला के सर्टिफिकेट प्रशिक्षण कोर्स में रासाचार्य बच्चों को भिजवाएं।
रासाचार्य दुष्यंत शर्मा ने कहा कि सरकारी स्तर पर रास की मंडलियों को पंजीकृत कराया जाए। उन्हें सरकारी मंचों पर कार्यक्रम मिलें।
रासाचार्य देवकीनंदन शर्मा ने कहा कि नई पीढ़ी रासलीला सीखना नहीं चाहती। इस कारण रास मंडलियां खत्म हो रहीं हैं। बगैर सरकारी संरक्षण के इन्हे बचाना संभव नहीं है। रासलीला से ही मोर नृत्य आदि लोक विधाएं उत्पन्न हुई हैं। इसे सरकार के आशीर्वाद की आवश्यकता है
रासाचार्य स्वामी लेखराज ने कहा कि परिवर्तन के दौर में रासलीला बचाने का प्रयास तभी सफल होगा जब इन्हे आर्थिक संकट से उबारा जाए। रासलीला में पखावज, हारमोनियम सीखने वालों को पूरा पारिश्रमिक मिले। ब्रजभाषा न बोलने से भी रासलीला का ह्रास हो रहा है। जिस तरह सर्कस खत्म हो गए हैं, वही हाल रासमंडलों का है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद कोर्स के लिए रासाचार्यों से मदद ले।
रासाचार्य दामोदर शर्मा ने कहा कि वृंदावन का रास देखने के लिए ही देवरहा बाबा, गया प्रसाद आदि संत वृंदावन आए और यहीं तपस्या की। रासलीला को सरकारी संरक्षण मिला तो यह फिर सिरमौर हो जाएगी। स्वामी नेमीचंद ने रासलीला बचाने के उपाय सुझाए।
रासाचार्य भावेश कृष्ण ने कहा कि रासलीला में सखी का स्वरूप बिगड़ गया है। आज पहनावे पर ध्यान देने की जरूरत है। रासाचार्य गिरिराज शरण वशिष्ठ ने रासलीला के पतन और उसके उत्थान पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में सभी रासाचार्यों को लोई उढ़ाकर सम्मानित किया गया। गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा और गीता सीख रहे बच्चों को सम्मानित किया गया। अंत में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने श्री कपिल उपाध्याय व अन्य रासाचार्य का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वृंदावन के रासाचार्य संस्थान के सर्टिफिकेट कोर्स के प्रशिक्षण में अपना सहयोग दें। बच्चों को रास मंचन कोर्स करने के लिए प्रोत्साहन दें। मंडलियों को फिर से सक्रिय करें। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रयासों को सफल बनाएं।
7455095736
Author: Vijay Singhal
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