हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर मंदिर में व्यवस्था परिवर्तन लेकर को लेकर एक बार फिर हाईपावर्ड प्रबंध कमेटी और सेवायत गोस्वामी आमने-सामने आ गए। वीआईपी कठघरे में सेवायत के परिजन एवं यजमानों को दर्शन के लिए नहीं आने देने पर सेवायताें ने रोष व्यक्त किया। सेवायत गोस्वामियों ने मंदिर की व्यवस्थाओं में हो रहे बदलाव पर नाराजगी जताई साथ ही आरोप लगाया कि उन पर मंदिर परंपराओं के विपरीत ठाकुरजी को गर्भगृह से बाहर निकालने का दबाव बनाया जा रहा है। श्रीबांकेबिहारी मंदिर में बृहस्पतिवार से मंदिर की व्यवस्था में परिवर्तन की बात सामने आई। मंदिर के सेवायत ब्रजेश गोस्वामी एवं सुनीत गोस्वामी की तीन मार्च से शुरु हुई ठाकुरजी की सेवा 26 मार्च तक रहेगी। मंदिर के सेवायत गोस्वामियों ने पुरानी व्यवस्था को कायम रखते हुए गर्भगृह में ही आराध्य को विराजमान कर सेवा एवं शृंगार कर भक्तों को दर्शन कराए। आरोप है कि सेवायत की सेवा के दो दिन बाद बृहस्पतिवार को बिना किसी लिखित संदेश के व्यवस्था में बदलाव कर दिया। वीआईपी कठघरा के सामने दान पेटियां लगा दीं और सेवायत गोस्वामियों के परिजन एवं यजमानों को वीआईपी कठघरों में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसे लेकर सेवायत गोस्वामी मंदिर की पीछे चंदन कोठरी के गेट एकत्र हुए और रोष व्यक्त किया। विलास गोस्वामी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी हाईपावर्ड कमेटी को भीड़ प्रबंधन पर कार्य करना था, वह भीड़ प्रबंधन के नाम पर मंदिर की प्राचीन परंपराओं से छेड़छाड़ का प्रयास कररही है। उन्होंने प्रबंधन कमेटी के सदस्य गोस्वामियों पर भी सवाल खड़े किये। उन्हें विश्वास में लेकर ठाकुरजी की परंपाओं से खिलवाड़ करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रबंध कमेटी 12 महीने सुबह और शाम की सेवा में ठाकुरजी को जगमोहन में लाने पर अड़ी है जबकि मंदिर परंपरा अनुसार ठाकुरजी का शृंगार, भोगराग, शयन गर्भगृह में होता है। विशेष पर्व पर उच्च न्यायालय से निर्धारित अवसरों पर ही वह जगमोहन में आते हैं। कमेटी को परंपराओं को ध्यान में रखकर ठाकुरजी का दर्शन कैसे सुलभ हों, इस पर विचार करे तो मंदिर का गोस्वामी समाज भी उनके साथ है। सेवायत जौनी गोस्वामी ने कहा कि हाईपावर्ड कमेटी एक तरफ देहरी पूजन पर रोक लगा रही है। वहीं कमेटी खुद पूजन कर रही हैं। यह दोहरा मापदंड उचित नहीं। रोष व्यक्त करने वालों में हिंमाशु गास्वामी, देव गोस्वामी, मुन्नू गाेस्वामी, कृष्णा गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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