हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। अस्पतालों में प्रसव के बाद प्रसूताओं के घरवाले चिकित्सकों की सलाह के विपरीत जाकर छुट्टी करा रहे हैं। डाक्टरी सलाह की अनदेखी प्रसूताओं को खतरे में डाल रही है। बीते एक साल में इस प्रकार के करीब 3500 केस सामने आए हैं, जिनमें प्रसूताओं को डिलीवरी के 48 घंटे के भीतर अस्पताल से उनके परिजन लेकर चले गए जबकि चिकित्सकों का कहना है कि इतनी जल्दी अस्पताल से छुट्टी कराना जोखिम भरा है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले में सरकारी अस्पतालों में 20 हजार से अधिक महिलाओं का प्रसव हुआ है। इसमें 3500 से अधिक प्रसूताएं 48 घंटे भी अस्पताल में नहीं रुकीं और घरवाले उनको लेकर चले गए। इस वर्ष भी अप्रैल से जुलाई तक 4 हजार के करीब प्रसव हुए। इनमें से 600 से अधिक प्रसूताओं को घरवाले दो दिन के भीतर ही अस्पताल से छुट्टी करा ले गए। सीएमओ डा. अजय कुमार वर्मा ने बताया कि प्रसव के 48 घंटे तक पोस्ट पार्टम हेमरेज (अधिक रक्तस्राव) का खतरा अधिक होता है। मातृ मृत्यु के मामलों में 50 प्रतिशत से अधिक केस पोस्ट पार्टम हेमरेज ही वजह के ही सामने आते हैं। सामान्य प्रसव में चिकित्सक कम से कम 2 दिन और सिजेरियन प्रसव में 5 दिन तक प्रसूता को अस्पताल में ही रुकने की सलाह देते हैं। इसकी वजह है कि प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव समेत अन्य परेशानी का तत्काल इलाज किया जा सके। कई बार प्रसूता को डिलीवरी के बाद घरवाले छुट्टी कराकर घर ले जा रहे हैं। इससे प्रसूता की जान को खतरा पैदा होता है। इस संबंध में प्रसूताओं और घरवालों की काउंसिलिंग भी की जा रही है।
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Author: Vijay Singhal
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