हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में भगवान राधा कृष्ण की भूमि में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म उत्सव धूमधाम से आज मनाया जा रहा है। उत्तर भारत के विशालतम रंगनाथ मंदिर में भगवान राम, सीता जी और लक्ष्मण जी का 9 पवित्र नदियों के जल, जड़ी-बूटी, औषधि युक्त जल से अभिषेक किया गया। यमुना, गंगा, नर्मदा, कावेरी, मंदाकिनी, अलकनंदा, कृष्णा, सरस्वती, ब्रह्मपुत्र नदियों से जल लाए गए। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंचामृत से अभिषेक हुआ। 3 दिवसीय राम नवमी उत्सव का शुभारंभ गुरुवार से हुआ। अभिषेक के बाद भगवान राम, सीता जी और लक्ष्मण जी का श्रृंगार किया गया। करीब 2 घंटे तक अभिषेक और श्रृंगार करने के बाद प्रभु की पहले कुंभ आरती की जाएगी। कुंभ आरती यानी भगवान की नजर उतारी गई। इसके बाद प्रभु को तरह-तरह के बनाए गए व्यंजन के भोग अर्पित किए गए। शाम के समय भगवान राम की सवारी हनुमान जी पर विराजमान कर मंदिर परिसर में निकाली जाएगी। दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में पूजा सेवा, उत्सव सौर पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं। यहां पांचरात विधि से पूजन-अर्चन किया जाता है। मंदिर के सेवायत चक्रपाणि मिश्रा ने बताया कि सौर पंचांग के अनुसार राम नवमी का पर्व इस बार 29 अप्रैल शनिवार को पड़ रहा है। इसीलिए मंदिर में राम नवमी अन्य स्थानों की अपेक्षा 1 महीने बाद मनाई जा रही है। उत्सव के पहले दिन गुरुवार शाम को भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की सवारी निकाली गई। निज मंदिर से प्रभु के विग्रह चांदी की पालकी में विराजमान होकर रथ मंडप पर पहुंचे। जहां भगवान के विग्रहों को सूर्य वाहन में विराजमान किया गया। इसके बाद आरती की गई और फिर सवारी निकाली गई। उत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह भगवान का विधि विधान से पूजन अर्चन किया गया। मंदिर के पुजारी रंगा स्वामी ने वैदिक मंत्रों के बीच भगवान की पूजा की। शाम के समय भगवान राम के विग्रह को स्वर्ण यानी सोने से बने हाथी पर विराजमान किया गया। छोटे रथ पर रखे हाथी पर विराजमान भगवान के दर्शन अलौकिकता बिखेर रहे थे। प्रभु के दर्शन की झलक इस तरह से लग रही थी कि जैसे कोई महाराजा हाथी पर विराजमान होकर निकले हों।
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Author: Vijay Singhal
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