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महावन में अखिल भारतीय संस्कृत भारती शलाका परीक्षा का आयोजन मेंरमणरेती आश्रम में शलाका विद्याथिर्यों को किया पुरस्कृत,

ByVijay Singhal

Feb 27, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। महावन में अखिल भारतीय संस्कृत भारती
शलाका परीक्षा का आयोजन रमणरेती आश्रम महावन में किया गया। जिसमें देश के कोने-कोने से प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। शलाका परीक्षा में 286 विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन 125 प्रतिभागियों ने ही हिस्सा लिया। कार्यक्रम समापन में पीठाधीश्वर कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज एवं कार्ष्णि बृजेशानंद महाराज ने विद्यार्थियों को सम्मानित किया। संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए अखिल भारतीय स्तर पर संस्कृत भाषा के संरक्षण संवर्धन के प्रति समर्पित संस्था संस्कृत भारती द्वारा संस्कृत भाषा की सबसे बड़ी और सबसे प्राचीन कठिन परीक्षा, शलाका परीक्षा का आयोजन काराया गया। आयोजन रमणरेती महावन स्थित गुरू कार्ष्णि विध्या भवन प्रांगण में हुआ। जहां पूर्ण वैदिक विधि विधान से शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो.गोपबंधु मिश्रा एवं शलाका परीक्षा के राष्ट्रीय संयोजक प्रो.कृष्णकांत शर्मा , स्वामी कृष्ण चैतन्य महाराज,डां.संजीव,डॉ. शिवशंकर मिश्रा संयुक्त रूप से द्वारा किया गया। शलाका परीक्षा का आयोजन अखिल भारतीय स्तर पर किया गया। जिसमें सम्पूर्ण भारत के विभिन्न प्रान्तों से विभिन्न विश्वविद्यालयों के 125 संस्कृत के विद्यार्थियों ने सहभागिता सुनिश्चित की जिसमें , आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली,गोवा, हिमाचल, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, केरला, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मणिपुर, उड़ीसा आदि प्रदेशों से सहभागिता रही। संस्कृत के 9 विषयों क्रमश: अमर कोष, वेदांत, साहित्य, ज्योतिष, व्याकरण,न्याय,योग, मीमांसा,लधुसिद्धान्तकौमुदी विषयों के लिए अलग अलग मंच बनाये गये। प्रत्येक विषय की परीक्षा के लिए तीन संस्कृत विद्वान मंच पर आसीन थे जिन्होंने क्रमश विद्यार्थियों की परीक्षा संबंधित विषय के ग्रंथ में शलाका लगाकर प्रश्न पूछे। यह दृश्य प्राचीन भारतीय संस्कृति की गुरुकुल परम्परा के प्रत्यक्ष दर्शन करा रहा था, वैदिक मंत्र और श्लोकों के उच्चारण की मधुर ध्वनियां परीक्षा प्रांगण के विभिन्न कक्षों में गुंजायमान हो रही थी। यह परीक्षा पूर्णतया खुले मंच पर आयोजित की गई परीक्षा में प्रत्येक विद्यार्थी ने अपने से संबंधित विषय को कंठस्थ कर रखा था। जो कि आज की आधुनिक शिक्षा पद्धति से अलग ही संदेश दे रहा है। परीक्षाओं उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पीठाधीश्वर कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज ने शाल एवं प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। न्याय में प्रथम पुरस्कार पूरक वामकोट द्वितीय भाव वासुदेव, तृतीय प्रदीप बोडेल, मीमांस में प्रथम एस वी राघवन, द्वितीय रवि तेजा, तृतीय अर्थव दीक्षित, लधुसिद्धान्तकौमुदी प्रथम रोहण सुबेरी, द्वितीय नवरत्न, तृतीय सहयोग, व्याकरण में प्रथम शिव प्रसाद शुक्ल, द्वितीय पीयूष, तृतीय माधव ओमशंकर योग दर्शन में प्रथम लक्ष्मी कांत अवस्थी द्वितीय अंकित तिवारी, साहित्य में प्रथम पुरस्कार विमलेश कुमार शुक्ल, द्वितीय अभिषेक त्रिपाठी, तृतीय बृजेश जोशी, अमर कोष में प्रथम हरिशंकर, द्वितीय जीबा आचार्य, तृतीय प्रशांत त्रिपाठी, वेदांत में प्रथम रामकृष्ण मिश्र द्वितीय शिव सहाय, तृतीय कृष्णेन्द्र बेरा, ज्योतिष में प्रथम विमा मिश्र द्वितीय सुधांश शुक्ल तृतीय गणेश प्रसाद भट्ट आदि को पुरस्कृत किया गया।कार्यक्रम में कार्ष्णि दिव्यानंद महाराज, ओम प्रकाश बंसल, गंगाधर अरोड़ा,गौरव, रघुवीर सिंह पाल,प्रदीप श्रीवास्तव, राधा, आचार्य बृजेन्द्र नागर, मुरलीधर शास्त्री,पं. रामदास चतुर्वेदी शास्त्री, अनुराग , दिनेश मिश्रा, हरिचंद , हरस्वरूप यादव, आदि प्रमुख रूप से सहयोग में रहे हैं।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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