हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण पर दिए गए बयान के समर्थन में संत एवं धर्माचार्यों ने श्रीराधाकांत मंदिर में सभा आयोजित की। ब्रज तीर्थ देवालय न्यास एवं धर्म रक्षा संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सभा में संतों ने एक स्वर में कहा कि किसी भक्त द्वारा अपने आराध्य के स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करना अपमान नहीं माना जाना चाहिये। सभा की अध्यक्षता कर रहे महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि संतों ने भगवान को अनेक आत्मीय संबोधनों से पुकारा है। जब तक किसी कथन के पीछे दुर्भावना न हो, तब तक उसे अनावश्यक विवाद का विषय बनाने के बजाय उसके आध्यात्मिक भाव को समझना चाहिए। भागवताचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने कहा कि भगवान के अलौकिक स्वरूप का वर्णन भक्त कवियों, रसिक संतों और आचार्यों द्वारा सदियों से किया जाता रहा है। ऐसे में किसी भक्त द्वारा अपने आराध्य के स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करना अपमान नहीं माना जाना चाहिये। अखाड़ा परिषद वृंदावन के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप पूजनीय है। रसिक संतों ने ठाकुरजी की बांकी चितवन, बांकी अदा और त्रिभंगी मुद्रा का बड़े प्रेम से वर्णन किया है। धीरेंद्र शास्त्री के कथन को इसी भक्ति परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए। धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म और हिंदू समाज को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उनके कथन को उसके भाव और संदर्भ से अलग करके विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के महामंत्री आरके पांडेय ने कहा कि श्रीबांकेबिहारी का अर्थ ही उनके अनुपम, मनमोहक और त्रिभंगी स्वरूप से जुड़ा हुआ है। धीरेंद्र शास्त्री के बयान को ब्रज की इसी रसिक परंपरा के आलोक में समझने की आवश्यकता है।
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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में आए संत एवं धर्माचार्य
