हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के सहयोग से भगवत प्रेरणा वैदिक विद्यापीठ गुरुकुलम, गोधूलिपुरम के बटुकों ने श्रीमद्भगवद्गीता के नवम अध्याय के 22वें श्लोक पर आधारित एक प्रेरक नाट्य मंचन प्रस्तुत किया। इस आयोजन में गुरुकुल के विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए गीता के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं, गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के प्रशिक्षु बालक-बालिकाओं ने मयूर नृत्य, डांडिया और महारास की मनोहारी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरुकुल के बटुकों ने आचार्य राघव शुक्ला शास्त्री के सानिध्य में नाट्य मंचन किया। इस मंचन का आधार गीता के नवम अध्याय का 22वां श्लोक ‘अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥’ था। इस श्लोक के माध्यम से यह समझाया गया कि भगवान श्रीकृष्ण अनन्य भाव से उनकी उपासना करने वाले भक्तों के योगक्षेम का दायित्व स्वयं लेते हैं। गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा ने मंचन के भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गीता में दिए गए उपदेशों का महत्व शाश्वत है और गीता का प्रत्येक शब्द जीवन के लिए प्रेरणादायी है। मंचन के माध्यम से इन्हीं शिक्षाओं को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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वृंदावन में गूंजा श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश, ‘योगक्षेमं वहाम्यहम्’ पर भावपूर्ण नाट्य मंचन ने मोहा मन
