हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा।स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीन कार्यप्रणाली के चलते जिले में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाना मुश्किल हो गया है। एक बुजुर्ग छह माह से दिव्यांग सर्टिफिकेट बनबाने के लिए भटक रहा है। जिला मुख्यालय से संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर सोमवार और शुक्रवार को बैठते हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति की कोई निश्चितता नहीं रहती। कई बार डॉक्टरों की गैरमौजूदगी तो कभी दस्तावेजों में मामूली कमी का हवाला देकर दूर-दराज से आने वाले लाचार मरीजों को बैरंग लौटा दिया जाता है। नौहझील क्षेत्र के गांव फिरोजपुर निवासी बुजुर्ग धर्मवीर बढ़ती उम्र और कानों से बेहद कम सुनने (श्रवण दिव्यांगता) की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। भरण-पोषण के लिए दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ पाने की उम्मीद में वह पिछले चार माह तक वृंदावन अस्पताल की परिक्रमा करते रहे। वृंदावन से मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइल जिला मुख्यालय भेजी गई, लेकिन पिछले दो महीनों से धर्मवीर सीएमओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ित धर्मवीर ने बताया कि काम-धंधा बंद होने और गंभीर आर्थिक तंगी के बावजूद वह कर्ज लेकर व किराए-भाड़े का बंदोबस्त कर दफ्तरों तक पहुंचते हैं। करीब दो महीने पहले जिला मुख्यालय पर सारे दस्तावेज जमा करने के बाद भी अब तक बाबू केवल तारीख पर तारीख दे रहे हैं।शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय पर बैठी मांट क्षेत्र के गांव भाव नगला निवासी बुजुर्ग महिला रामवती ने बताया कि उसके बेटे की नौ साल पहले रीढ़ की हड्डी में चोट लग गयी थी। तभी से उसकी कमर का निचला हिस्सा खराब हो गया है। चलने फिरने और खड़े होने में भी असमर्थ है। कोई सहायता करने वाला भी ऐसा नहीं है जो उसका दिव्यांग सर्टिफकेट बनवा सके, इसलिए स्वयं ही आना पडा है। यहां बैठे बाबूजी ने वृंदावन जाने के लिए बोल दिया है।
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मथुरा में दिव्यांग सर्टिफिकेट के लिए 6 माह से भटक रहा बुजुर्ग
