हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। यमुना किनारे स्थित ऐतिहासिक बटेश्वर महादेव बगीची परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास स्वामी कार्ष्णि सुमेधानंद महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न मनमोहक लीलाओं का रसपान कराया। कथा के मुख्य परीक्षित पूरन देवी एवं सत्येंद्र सिंह राघव रहे, जिन्होंने सपत्नीक व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान स्वामीजी ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल से मथुरा प्रस्थान, उखल बंधन, गोवर्धन पूजा और कंस वध के प्रसंगों का अत्यंत सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर धारण किया था। कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ता है, तब-तब ईश्वर अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हैं। कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला रही। स्वामी सुमेधानंद ने कहा कि महारास कोई साधारण रास नहीं, बल्कि जीव और ब्रह्म के मिलन का प्रतीक है। महारास की कथा सुनते ही श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और बांके बिहारी लाल की जय के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।
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भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुन भावुक हुए श्रोता
